मुआवजा वितरण में 380 करोड़ का खेल
एजेंसी
अमेठी : अमेठी में मुसाफिरखाना तहसील क्षेत्र के अंतर्गत एनएच 56 से जुड़े दो बाईपास के लिए मुआवजा वितरण के नाम पर लगभग 380 करोड़ से अधिक का खेल सामने आया है। जिम्मेदार अधिकारियों ने वर्ष 2016 में मुसाफिरखाना और जगदीशपुर क्षेत्र में बने दो बाईपास के लिए अधिग्रहीत की गई गांव की जमीन के मुआवजे के रूप में एनएच के रेट से पैसा बांट दिया गया। मामले में एनएचएआई ने 2020 में ही वाद दायर किया था लेकिन अब डीएम ने संज्ञान में आने के बाद मामले में एडीएम न्यायिक की अगुआई में चार सदस्यीय कमेटी गठित की गई है। कमेटी की जांच में प्रथम दृष्टया भारी गड़बड़ी की पुष्टि हुई है।
जिले की मुसाफिरखाना तहसील अंतर्गत 49.5 किलोमीटर दायरे में लखनऊ वाराणसी राजमार्ग एनएच 56 गुजरता है। एनएच बनने के बाद जगदीशपुर और मुसाफिरखाना क्षेत्र में एक-एक बाईपास का निर्माण करवाया गया। वर्ष 2016 से 2020 के मध्य जगदीशपुर में उतेलवा से कनकूपुर के मध्य एक बाईपास का निर्माण किया गया। इसके लिए लगभग 95 हेक्टेअर जमीन का अधिग्रहण किसानों से किया गया।
वही मुसाफिरखाना में मठा भुसुंडा से सराय सुलेमान के मध्य बाईपास का निर्माण किया गया। इसके लिए लगभग 38 हेक्टेअर किसानों की जमीन का अधिग्रहण किया गया। इसी मुआवजा वितरण के नाम पर सक्षम अधिकारियों ने खेल कर दिया।
क्या हुई गड़बड़ी
जांच कर रही टीम से जुड़े एक अफसर ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि कुछ हिस्से को छोड़कर बाईपास की सभी जमीने ग्रामीण क्षेत्रों की कृषि योग्य जमीनें थी। उनके मुआवजे का निर्धारण भी ग्रामीण सर्किल रेट पर किया जाना था। जबकि मुआवजा वितरण करने वाले जिम्मेदारों ने सभी जमीनों का मुआवजा एनएच के सर्किल रेट पर कर दिया।
इससे एनएचआई को लगभग 380 करोड़ रुपए की क्षति हुई है। प्रशासनिक सूत्र बताते हैं कि सही मुआवजा लगभग 180 करोड़ बन रहा था लेकिन लगभग 561 करोड़ रुपए मुआवजे के रूप में बांट दिए गए।
कैसे खुला मामला
एनएचआई के जिम्मेदारों ने गड़बड़ी का शक होने पर 2020 में ही आर्बिट्रेशन वाद दायर किया। वाद में एनएचआई ने अभिनिर्णय और भुगतान पर सवाल खड़े किए थे। यह फाइल जब डीएम राकेश कुमार मिश्र के संज्ञान में आई तो उन्होंने इसे गंभीरता से लेते हुए तत्काल एडीएम न्यायिक राजकुमार द्विवेदी की अगुवाई में चार सदस्यीय जांच कमेटी गठित कर दी।
कमेटी में एसडीएम मुसाफिरखाना सविता यादव वरिष्ठ कोषाधिकारी आलोक राजवंशी व एआईजी स्टाम्प सीपी मौर्य को भी शामिल किया गया है। कमेटी ने जब जांच शुरू की तो गड़बड़ियां परत दर परत खुलती गई।
बोलने को तैयार नहीं जिम्मेदार
मामले की गंभीरता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि प्रकरण पर कोई भी जिम्मेदार अफसर बोलने को तैयार नहीं है। जांच टीम से जुड़े सदस्य तथ्यों को बताने से इंकार करते दिखे। डीएम ने भी प्रकरण में कुछ भी बोलने से इंकार किया है।
परियोजना निदेशक सीएम द्विवेदी पूरा मामला अब आर्बिट्रेटर के पास है। मुआवजा को लेकर कोई गड़बड़ी है तो उसी का निर्णय अंतिम होगा। जिले से मुआवजे में अनियमितता की रिपोर्ट आ चुकी है।
गांव की जमीन, रेट एनएचआई का
