- जानिए! ढोसी हिल्स की विशेषताओं के बारे में
- प्राचार्य डॉ. अनिता तँवर ने महर्षि च्यवन के बारे में कराया अवगत
- पर्वतारोहण प्रतियोगिता में छात्रा नचिता, प्रिया, अंतिम और कृपा रही विजेता
कपिल शर्मा /गौरवशाली भारत
नाँगल चौधरी। शहर के बैजनाथ चौधरी राजकीय महिला महाविद्यालय की 50 छात्राओं के दल ने बुधवार को ढोसी पहाड़ी नारनौल नजदीक गांव कुलताजपुर स्थित ढोसी का ट्रैकिंग किया। काॅलेज की प्राचार्या डॉ. अनीता तवर ने पूर्वाह्न नौ बजे हरी झंडी दिखाकर ट्रैकिंग टीम को रवाना किया।
इस दौरान प्राचार्या ने ढोसी हिल्स की विशेषता पर प्रकाश डालते हुए, मनसा माता आदि के बारे में छात्राओं को अवगत कराया। डाॅ. अनीता तंवर ने छात्राओं को ढोसी की पहाड़ी पर रहने वाले महर्षि च्यवन की तपोभूमि भी के बारे में भी बताया साथ ही उन्होंने कहा कि, महर्षि च्यवन ने सबसे पहले च्व्यवनप्राश की शुुरुआत की। उन्होंने कहा, यहाँ पहले औषधियुक्त जड़ी-बूूटियांँ उपलब्ध होती थी। अब वह सब नहीं रही और अब च्व्यवनप्राश में भी मिलावट होने लगी है। अधिकांश च्व्यवनप्राश ड्यूप्लिकेट आता है। प्राकृतिक चीज़ अब नहीं रही है। उन्होंने छात्राओं को बताया कि, यहाँ हिल्स पर जड़ी़-बूटियों के साथ-साथ सोना-चाँदी, ताँबा आदि माइंस से प्राप्त होता था। डाॅ. अनीता तंवर ने कहा कि, ढोसी हिल्स से पहले प्राकृतिक बरसात पानी एवं शिवकुंड जल से काॅफी लाभ मिलता था। चर्म, कुष्ठ रोग, पेट रोगियों को औषधि का कार्य करता था।
काॅलेज टूर पर्वतारोहण के दौरान ढोसी भ्रमण प्रतियोगिता करवाई गई, जिसका समय एक घंटे रखा गया। इस प्रतिस्पर्धा में उत्साह सहित अधिकांश छात्राओं ने भाग लिया जिसमें प्रथम स्थान पर बीए वर्ष की छात्रा नचिता, द्वितीय स्थान पर बीए प्रथम वर्ष की छात्रा प्रिया और बीए प्रथम वर्ष की अंतिम संयुक्त रूप से और तृतीय स्थान पर बीए तृतीय वर्ष की छात्रा कृपा विजेता रही।
इस प्रतियोगिता का संचालन महिला प्रकोष्ठ प्रभारी डॉ. सुशीला यादव की देखरेख में संपन्न हुआ। इस अवसर पर डाॅ. पिंकी प्रजापत, डाॅ. सुदेश, डाॅ. ममता यादव, डाॅ. सरोजबाला, डाॅ. राजबाला, राजेंद्र एवं गजराज आदि उपस्थित रहे l

ढोसी बनेगा जल्द पर्यटन स्थल
बता दें कि, नारनौल नजदीक गांव कुलताजपुर में स्थित ढोसी की पहाड़ी का जल्द ही कायाकल्प होगा। मीडिया रिपोर्ट अनुसार बीते वर्ष 23 अक्तूबर को मुख्यमंत्री द्वारा भी इस पहाड़ी का निरीक्षण करने के बारे में बताया गया है। यहां पर पर्यटन की अपार संभावनाएं हैं। प्रदेश सरकार जिला महेंद्रगढ़, विधानसभा क्षेत्र नारनौल एवं रेवाड़ी को टूरिज्म सर्किट के रूप में जोड़ रही है।
जानें ढोसी हिल्स के पीछे की कहानी
जिला महेंद्रगढ़ के अंतर्गत ढोसी की पहाड़ी देश व प्रदेश में प्रसिद्ध है। यहाँ प्रत्येक सोमवती अमावस्या को मेला लगने के साथ-साथ हर वर्ष श्रावण माह में श्रद्धालुओं की भीड़ देखी जा सकती है। बताया जाता है कि, यहाँ द्वापर युग में पाण्डवों ने अज्ञातवास के दौरान पहाड़ से उत्पन्न हुए शिवलिंग की विशेष पूजा-अर्चना की। यहाँ शिव परिवार समेत हनुमान जी की प्रतिमा और कई सिद्धी युक्त महर्षियों की चरण पादुकाएंँ भी स्थापित हैं। जिसमें एक चरण प्रतीक महाराज रामेश्वर दास के भी स्थापित हैं।
ढोसी पर किसने की तपस्या और कौन थे महर्षि च्यवन
ढोसी की पहाड़ी महर्षि च्यवन की तपोभूमि भी है। च्यवन ऋषि भृगु ऋषि के पुत्र थे। इस पहाड़ी का आधा हिस्सा राजस्थान व आधा हिस्सा हरियाणा की सीमा में लगता है। इस पर बना मंदिर व शिव कुंड हरियाणा की सीमा में आते हैं। बताते हैं कि महर्षि च्यवन तपस्या करते हुए उनके शरीर को दीमक लग गई थी। राजा शर्याति परिवार समेत ढ़ोसी की पहाड़ी पर भ्रमण करने को आए थे। राजा की लड़की सुकन्या ने महर्षि च्यवन की दोनों आंखों में लकड़ी के टुकड़े से घाव कर दिया जिससे महर्षि च्यवन की दोनों आंखों से रक्त की धार बहने लग गई। रक्त की धार बहने से राजा की लड़की सुकन्या व उसकी सहेली घबराकर राजा शर्याति के पास आई और सारी कहानी राजा को बताई।
राजा ने सुकन्या को साथ लेकर महर्षि च्यवन की तपस्या स्थल पर जाकर देखा तो राजा शर्याति की आंखें नम हो गई। उसी वक्त राजा ने आदेश दिया कि राजकुमारी महर्षि की सेवा के लिए ढोसी पर रहेगी व राजकुमारी सुकन्या का पाणिग्रहण भी महर्षि च्यवन के साथ कर दिया। राजकुमारी सुकन्या की कम आयु को देखकर देवताओं ने च्यवन महर्षि को एक औषधि बताई जिससे महर्षि च्यवन ने उपयोग की और युवा हो गए। जिससे उस औषधि का नाम बाद में च्यवन हुआ जिसे आज लोग शक्ति, च्यवनप्राश के नाम से जानते हैं। जो स्वास्थ लाभ के लिए ग्रहण करते है।
इस क्षेत्र के प्रसिद संत बाबा रामेश्वर दास ने भी ढोसी मंदिर से ही दीक्षा ली थी। पहाड़ी में अनेक औषधि हैं। लेकिन परखने वाला नहीं है। पहाड़ी पर बना शिव कुंड में नहाने से चर्म रोग दूर होता है। ढोसी पहाड़ की चोटी पर उपलब्ध विस्तृत स्थान पर महर्षि च्यवन की तपोस्थली के महत्व के अनुरूप ही वहां एक पर्यटन केंद्र स्थापित करने के साथ-साथ एक ऐसा महत्वपूर्ण पर्यटन केंद्र बनाने के लिए अन्य ऐतिहासिक स्थलों को जोड़कर पर्यटन की एक पूरी श्रृंखला तैयार करने की योजना सरकार द्वारा उपलब्ध होनी चाहिए।
