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आयुष कॉलेजों में 891 फर्जी-दाखिला में एसटीएफ का बड़ा एक्शन

निलंबित आयुर्वेद निदेशक प्रो.एसएन सिंह और मास्टरमाइंड समेत 12 गिरफ्तार
लखनऊ :
यूपी के आयुष कॉलेजों में 891 फर्जी दाखिला मामले से जुड़ी बड़ी खबर हैं। मेरिट में बदलाव करके छात्रों के प्रवेश के मामले में एसटीएफ यानी स्पेशल टास्क फोर्स ने बड़ी कार्रवाई करते हुए मास्टरमाइंड समेत निलंबित आयुर्वेद निदेशक को गिरफ्तार कर लिया हैं।
इनमें जांच में दोषी पाए गए निलंबित निदेशक, आयुर्वेद सेवाएं और सदस्य सचिव काउंसिलिंग प्रो. एसएन सिंह के अलावा निलंबित प्रभारी अधिकारी शिक्षा निदेशालय, आयुर्वेद सेवाएं डॉ.उमाकांत यादव, निदेशालय में काउंसिलिंग की फीस जमा करने की जिम्मेदारी संभालने वाले लिपिक राजेश सिंह और दूसरे सहयोगी लिपिक कैलाश चंद्र भास्कर के नाम शामिल हैं। इनसे पूछताछ में कई और इनपुट मिले हैं। हालांकि अभी स्ञ्जस्न के अधिकारी इसका खुलासा नहीं कर रहे हैं।
दाखिले में फर्जीवाड़े का खेल हुआ बेनकाब
जानकारी के मुताबिक इस पूरे फर्जीवाड़े का मास्टरमाइंड कुलदीप के गिरफ्त में आते ही हेराफेरी की सभी परतें पूरी तरह से खुल गईं। इसी के आधार पर एसटीएफ ने बड़ी कार्रवाई को अंजाम दिया। बड़ी बात ये भी हैं कि शासन ने 7 नवंबर को ही इस मामले की जांच सीबीआई से कराए जाने की सिफारिश की थी। अभी तक सीबीआई ने केस हैंड ओवर नहीं लिया है। इससे पहले ही एसटीएफ अपनी जांच में लगभग तह तक पहुंचने में कामयाब रही।
13 दिन की जांच में सामने आया नेक्सस
एसटीएफ ने काउंसिलिंग कराने वाली एजेंसी ङ्क3 सॉफ्ट सॉल्यूशन के 8 एम्प्लॉई को भी गिरफ्तार किया है। इनमें गौरव गुप्ता, हर्षवर्धन तिवारी, सौरभ मौर्य, रूपेश श्रीवास्तव, रूपेश रंजन पांडेय, इंद्र देव मिश्रा और प्रबोध कुमार सिंह शामिल हैं।
आयुर्वेद निदेशक ने ही दर्ज कराया था केस
आयुष कॉलेजों में सत्र-2021 में कुल 891 फर्जी छात्रों के प्रवेश का गंभीर मामला सामने आया था। जिसे सीएम योगी आदित्यनाथ ने बेहद गंभीरता से लिया था। प्रकरण में तत्कालीन कार्यवाहक निदेशक, आयुर्वेदिक सेवाएं प्रो.एसएन सिंह की ओर से 4 नवंबर को हजरतगंज कोतवाली में डाटा फीडिंग का काम कर रही कंपनी अपट्रान पावरट्रानिक्स और उसकी वेंडर कंपनी ङ्क-3 साफ्ट साल्यूशन प्राइवेट लिमिटेड के प्रतिनिधि कुलदीप सिंह सहित अन्य अज्ञात लोगों के खिलाफ धोखाधड़ी समेत अन्य धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई गई थी।
बड़ा मामला सामने आते ही इसकी जांच एसटीएफ को सौंप दी गई थी, जिसके बाद से पूरे प्रकरण में शामिल लोगों की छानबीन की जा रही थी। संदेह के घेरे में आए कई लोगों से अलग-अलग पूछताछ किए जाने के साथ ही एसटीएफ ने 23 कॉलेजों के प्राचार्य को नोटिस देकर तलब किया था और उनसे भी बारी-बारी पूछताछ की चल रही थी।

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