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बिजलीकर्मियों की रैली रामलीला मैदान पर नहीं, जंतर-मंतर पर होगी

चंडीगढ़। विद्युत संशोधन विधेयक के खिलाफ बुधवार (23 नवंबर) को बिजलीकर्मियों एवं अभियंताओं की रैली राजधानी दिल्ली के रामलीला मैदान पर करने की अनुमति न मिलने के कारण अब रैली जंतर-मंतर पर होगी।
नेशनल कोआर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी एम्पलाइज एंड इंजीनियर (एनसीसीओईईई) के संयोजक प्रशांत नंदी चौधरी, शैलेन्द्र दुबे और सुभाष लांबा ने मंगलवार को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि दिल्ली पुलिस ने निषेधाज्ञा का हवाला देते हुए रामलीला मैदान से संसद तक रैली निकालने की और रामलीला मैदान में एकत्रित होने की अनुमति नहीं दी है जिसके बाद आक्रोशित बिजली कर्मचारियों ने जंतर-मंतर पर प्रदर्शन करने का फैसला लिया है।
एक संयुक्त बयान में कर्मचारी नेताओं ने कहा कि दिल्ली नगर निगम चुनाव प्रचार में भाजपा को बड़ी-बड़ी रैलियां और रोड शो करने की तो इजाजत है, लेकिन बिजली कर्मचारियों को अपनी मांगों को लेकर लोकतांत्रिक तरीके से रैली करने की इजाजत नहीं है। उन्होंने कहा कि यह ट्रेड यूनियन व कर्मचारियों के लोकतांत्रिक अधिकारों पर हमला है।
उल्लेखनीय है कि इस प्रदर्शन की प्रमुख मांगों में विद्युत संशोधन विधेयक वापस लेने, निजीकरण हेतु जारी किये गये स्टैण्डर्ड बिडिंग डॉक्यूमेंट और ट्रांसमिशन के निजीकरण के आदेश को वापस लेने, पॉवर सेक्टर के निजीकरण की समस्त प्रक्रिया रद्द करने विशेष तौर पर केन्द्र शासित प्रदेश चंडीगढ और पुडुचेरी में निजीकरण की प्रक्रिया निरस्त करने, सभी मौजूदा निजीकरण व फ्रेंचाइजी करार रद्द करने, राज्यों में सभी बिजली कंपनियों का एकीकरण कर केरल में केएसईबी लिमिटेड और हिमाचल में एचपीएसईबी लिमिटेड की तरह एसईबी लिमिटेड का गठन करने, सभी बिजली कर्मचारियों और इंजीनियरों के लिये पुरानी पेंशन स्कीम लागू करने, तेलंगाना, ओडिशा,पंजाब और राजस्थान की तरह सभी प्रांतों में संविदा / दैनिक वेतन भोगी/ आउटसोर्स बिजली कर्मियों को नियमित करने व नियमित होने तक समान काम समान वेतन व सेवा सुरक्षा प्रदान करने, उर्जा क्षेत्र में सभी रिक्त पदों पर नियमित भर्ती से भर बेरोजगारों को रोजगार देने, सभी उपभोक्ताओं को वहनीय दरों पर 24 घंटे बिजली मुहैया कराये जाने और बिजली को मानव अधिकार बनाने की मांगें शामिल हैं।

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