केबल में लगी थी जंग; टूट गए थे एंकर पिन
मोरबी : मोरबी पुल हादसे की जांच में की जांच में कई बड़ी बातें सामने आई हैं। पता चला है कि जिस दिन पुल टूटा उस दिन ओरेवा ग्रुप ने 3165 टिकट बेचे थे। बता दें कि पुल हादसे में कम से कम 141 लोगों की मौत हो गई थी। इसके बाद पुल की मरम्मत और प्रबंधन के लिए जिम्मेदार ओरेवा ग्रुप पर सवाल उठाए गए। फॉरेंसिक साइंस लैबोरेटरी की शुरुआती जांच में खुलासा हुआ है कि पुल की केबल में जंग लगी थी। एंकर की मरम्मत नहीं की गई थी और अप्रशिक्षित कर्मचारियों ने मरम्मत की थी इसलिए बोल्ट भी ढीले थे।
बता दें कि हादसे में मरने वालों में 47 बच्चे थे जो कि अपने गार्जियन के साथ पुल पर घूमने आए थे। एक सरकारी वकील के मुताबिक रिपोर्ट को जिला न्यायालय में पेश किया गया है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि पुरानी केबल उस फ्लोरिंग का लोड उठाने में सक्षम नहीं थीं जो कि ओरेवा ग्रुप ने लगाई थी। इसके अलावा मोरबी ब्रिज का स्टाफ भी ट्रेन्ड नहीं था। उसे इस बात का पता ही नहीं था कि एक बार में पुल पर कितने लोगों को जाने की इजाज़त देनी चाहिए। इसके अलावा नदी के आसपास लाइफगार्ड्स का भी कोई इंतजाम नहीं था।
सोमवार को सुप्रीम कोर्ट ने इस हादसे को बेहद गंभीर बताया था। इसके अलावा गुजरात हाई कोर्ट से कहा था कि वह जांच की निगरानी करे। इसके अलावा हादसे के पीड़ितों को परिवार को भी उचित मुआवजा दिलवाया जाए। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था, कई बार आयोग मामले को गंभीरता से नहीं लेता। हम इस मामले को खुद देखते लेकिन हाई कोर्ट के चीफ जस्टिस मामले को देख रहे हैं।
जिला के सरकारी वकील विजय जानी ने कहा, पता चला है कि जिस केबल पर पूरा पुल लटका था उसमें जंग लगा था। इसके अलावा केबल जोड़ने वाले एँकर पिन टूटे हुए थे। बोल्ट तीन इंच तक ढीले थे। जिन लोगों को इस मामले में गिरफ्तार किया गया है उनमें ओरेवा ग्रुप के प्रबंधक दीपक पारेख और दिनेश दवे शामिल हैं। इसके अलावा मरम्मत करने वाले ठेकेदार प्रकाश परमार, देव प्रकाश सल्यूशन के मालिक देवांग परमार भी हैं। ओरेवा ग्रुप ने उन्हें मरम्मत का ठेका दे रखा था।
