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कानपुर के आराध्या हॉस्पिटल का लाइसेंस होगा खत्म

मरीज भर्ती पर रोक; ऑपरेशन के बाद 8 में से 4 की रेटिना सड़ गई, डॉक्टर होगा अरेस्ट
कानपुर :
बर्रा स्थित आराध्या आई हॉस्पिटल का लाइसेंस कैंसिल किया जाएगा। यहां से मोतियाबिंद का ऑपरेशन कराने वाले 8 बुजुर्ग लोगों की आंख की रोशनी चली गई। 4 ऐसे बुजुर्ग थे, जिनकी रेटिना पूरी तरह से सड़ गई। इस अस्पताल में फिलहाल नए मरीजों की भर्ती पर रोक लगा दी गई है। सीएमओ की जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद डॉक्टर की अरेस्टिंग भी हो सकती है।
ये लोग कर रहे पूरे मामले की जांच
सीएमओ डॉ. आलोक रंजन ने 3 सदस्यीय जांच कमेटी गठित की थी। जिसमें एसीएमओ डॉ. सुबोध प्रकाश और डॉ. एसके सिंह के साथ जीएसवीएम मेडिकल कालेज के एक सदस्य को नामित किया था। हालांकि नेत्र रोग विभागाध्यक्ष प्रो. परवेज खान और प्रो. शालिनी मोहन ने संयुक्त रूप से केस की जांच की है। प्राथमिक रिपोर्ट सीएमओ को सौंप दी गई है। अभी जांच जारी है।
मरीजों की कोई जांच तक नहीं की गई
अभी तक हुई जांच में सामने आया कि स्क्रीनिंग में ब्लड प्रेशर और ब्लड शुगर की जांच कराई जाती तो यह नौबत नहीं आती। डॉक्टर ने बिना सर्जिकल प्रोटोकॉल का पालन किए बुजुर्गों के आपरेशन कर दिए और आंखों में गंभीर संक्रमण होने से रोशनी चली गई।
बयान के बाद हो सकती है गिरफ्तारी
आराध्या आई हॉस्पिटल के डॉक्टरों द्वारा लगाए गए मेडिकल कैंप में आंख की रोशनी खोने के मामले में पुलिस जल्द ही पीड़ितों और नामजद डॉक्टर नीरज गुप्ता और एजेंट दुर्गेश शुक्ला के बयान दर्ज करेगी। बर्रा थाना प्रभारी मानवेंद्र सिंह ने बताया कि रिपोर्ट दर्ज कर आरोपितों को नोटिस भेजा जाएगा। फिलहाल गिरफ्तारी की धाराएं नहीं हैं। दोष साबित होने पर धाराएं बढ़ा कर गिरफ्तारी की जाएगी।
सर्जरी के बाई कोई चेकअप नहीं किया
सीएमओ डॉ. आलोक रंजन ने बताया कि मोतियाबिंद आपरेशन के 72 घंटे बाद मरीजों की आंख की जांच करना जरूरी है। आपरेशन कराने वाले सभी पीड़ितों ने बताया है कि डाक्टर ने आपरेशन के बाद दोबारा चेकअप नहीं किया है। मामले में डीएम विशाख जी ने बताया कि जांच रिपोर्ट मिलते ही लाइसेंस निरस्त किया जाएगा।

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