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कश्मीर के 3 जिले आतंकवादी मुक्त

एडीजीपी का दावा- लश्कर और जैश के पास कोई कमांडर नहीं; दो साल में आतंकवाद पूरी तरह मिटेगा
नई दिल्ली :
कश्मीर के तीन जिले आतंकवादी मुक्त हो गए हैं। कश्मीर के एडीजीपी विजय कुमार ने शनिवार को खुलासा किया कि आतंकवादी मुक्त जिलों में बांदीपोरा, कुपवाड़ा और गांदरबल का नाम शामिल है। जबकि आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद के कई कमांडर पिछले दिनों हुई मुठभेड़ों में मारे जा चुके हैं, इस कारण घाटी में दोनों संगठनों को चलाने वाला कोई नेता नहीं बचा है। हालांकि एडीजीपी ने यह भी कहा कि इन तीनों जिलों में अब भी 7 विदेशी आतंकवादी मौजूद हैं। कश्मीर के 13 पुलिस जिलों में अभी भी 81 आतंकवादी हैं जिनमें 29 लोकल और 52 विदेशी मूल के (पाकिस्तानी) हैं।
दो साल पहले कश्मीर में 80 टॉप कमांडर थे, अब केवल तीन
विजय कुमार ने बताया कि दो साल पहले तक कश्मीर में करीब 80 टॉप कमांडर्स थे। मौजूदा समय में हिजबुल मुजाहिदीन का फारूक नल्ली 2015 के बाद से एकमात्र एक्टिव कमांडर है और वह भी सेनाओं के रडार पर है। नल्ली के अलावा दो और कमांडर एक्टिव हैं। आंकड़ों में कहा गया है कि इस साल कश्मीर में कुल 169 आतंकवादी (127 स्थानीय आतंकवादी और 42 विदेशी आतंकवादी) मारे गए हैं। पहले कश्मीर में 15-18 हाइब्रिड आतंकवादी एक्टिव थे। अब भी ज्यादातर पुलवामा, शोपियां, कुलगाम, अनंतनाग और दक्षिण कश्मीर में हैं। विजय कुमार के मुताबिक जेके पुलिस ने इस साल 119 आतंकवादी मॉड्यूल्स का भंडाफोड़ किया है।
संभावित आतंकियों की वापसी कराई
पुलिस के मुताबिक कश्मीर में उनकी चिंता तुर्कीये से आने वाले हथियार, ओवर ग्राउंड महिला आतंकी और आतंकवादी बनने की दिशा में बढ़ने वाले कट्टर लोग हैं। पुलिस को इनमें से 13 को वापस लाने में कामयाबी भी मिली है। पुलिस ने इसे आतंकवाद की चौथी कैटेगरी संभावित आतंकवादी बताया है।
अगले दो साल में पूरा कश्मीर आतंकवाद मुक्त होगा
वहीं इस साल कश्मीर में आतंकवादी रैंकों में 99 लोग भर्ती हुए थे। ये आंकड़ा पिछले सात सालों में सबसे कम है। इनमें से 64 मारे गए और 17 को गिरफ्तार कर लिया गया। सेना और पुलिस इस संख्या 50 से कम करने के लिए काम कर रही है। उन्होंने कहा कि उम्मीद है कि अगले दो साल में कश्मीर से आतंकवाद का सफाया हो जाएगा।
कश्मीरी पंडितों ने नंगे पैर निकाला मार्च
उधर, कश्मीरी पंडित प्रवासी कर्मचारियों ने शनिवार को जम्मू में नंगे पैर एक मार्च निकाला। कश्मीरी पंडित कर्मचारी पिछले 200 दिनों से धरने पर हैं। 26 नवंबर को संविधान दिवस के दिन इन्होंने नंगे पैर मार्च निकालते हुए जीवन के अधिकार की मांग की। प्रदर्शनकारियों की मांग थी घाटी से उन्हें ट्रांसफर करने के लिए एक व्यापक रोडमैप तैयार करते हुए सरकार को उनकी सुरक्षा चिंताओं को दूर करे।

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