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विधायकों के इस्तीफे के मामले में जोशी को नोटिस

जयपुर : राजस्थान उच्च न्यायालय ने विधायकों के सामूहिक इस्तीफे मामले में आज विधानसभा अध्यक्ष सी पी जोशी को नोटिस जारी कर जवाब तलब किया हैं। न्यायमूर्ति एम एम श्रीवास्तव और न्यायमूर्ति विनोद कुमार भारवानी की खंडपीठ ने उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र सिंह राठौड़ की जनहित याचिका की आज सुनवाई के दौरान यह आदेश दिए। न्यायालय ने इस मामले में नोटिस जारी कर दो सप्ताह में जवाब मांगा है।
श्री राठौड़ ने इस मामले में अपनी पैरवी खुद करते हुए कहा कि विधायकों के सामूहिक इस्तीफों से वर्तमान सरकार सदन का विश्वास खो चुकी है। इसके बावजूद कैबिनेट बैठक कर नीतिगत निर्णय लिए जा रहे हैं। इस्तीफे स्वीकार नहीं करने से घोर संवैधानिक विफलता की स्थिति पैदा हो रही है। इसे रोकने के लिए कानूनी दखल जरूरी है। राज्य में गत 25 सितंबर से मौजूद संवैधानिक संकट पर स्थिति स्पष्ट होनी चाहिए।
उल्लेखनीय है कि गत 25 सितंबर को करीब नब्बे कांग्रेस विधायकों ने सामूहिक इस्तीफे विधानसभा अध्यक्ष को सौंप दिए थे। तब से ये इस्तीफे अध्यक्ष के पास लंबित हैं और इस मामले को लेकर श्री राठौड़ ने न्यायालय का दरवाजा खटखटाया था।
उधर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष डा सतीश पूनियां ने कहा है कि कांग्रेस विधायकों के इस्तीफा मामले पर न्यायालय की पहल स्वागत योग्य है।
डॉ. पूनियां ने नई दिल्ली में मीडिया से बातचीत में आज कहा कि पिछले दिनों राजस्थान चार साल से कांग्रेस का जो अंतकर्लह और अतंर्विरोध था, जिसकी परिणिति विधायकों के इस्तीफे से हुई, विधायकों ने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर स्पीकर के घर पर व्यक्तिगत इस्तीफे दिए। सामान्य तौर पर ऐसे दिए हुए इस्तीफों पर संज्ञान लिया जाता है लेकिन विधानसभा अध्यक्ष उस पर अनिर्णय की स्थिति में थे और न्यायालय को दखल करना पड़ा, उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़ की इस पीआईएल पर यह पहल न्यायालय ने की है, स्वागत योग्य तो है ही, लेकिन स्पीकर महोदय को यह सोचना है या कांग्रेस पार्टी के नेतृत्व को सोचना है कि इन इस्तीफों से राजस्थान में जो अस्थिरता हुई है उसका क्या होगा।
उन्होंने कहा कि लगता है जिस तरीके से इस्तीफा देने के बाद भी मंत्री और विधायक उसी तरीके से कामकाज कर रहे हैं, सरकारी दफ्तर चला रहे हैं मंत्री, तबादलों के आदेश कर रहे हैं, फाइलों पर साइन कर रहे हैं, इस्तीफे के बाद भी सरकार चल रही है, यह सोचने वाली बात है। उन्होंने कहा कि अब न्यायालय आगे क्या निर्णय करता है लेकिन विधानसभा अध्यक्ष को भी लोकतंत्र की मर्यादा में अक्षुण्णता के लिए निश्चित रूप से विचार करना चाहिए।

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