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पहाड़ों पर कचरे के पहाड़ नहीं बल्कि पेड़ हो : स्वामी चिदानन्द सरस्वती

स्वामी चिदानन्द सरस्वती और पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री भारत सरकार हरदीप सिंह पुरी की हुई भेंट वार्ता
ऋषिकेश :
अंतर्राष्ट्रीय पर्वत दिवस के अवसर पर परमार्थ निकेतन के अध्यक्ष स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी और पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री भारत सरकार श्री हरदीप सिंह पुरी जी की भेंटवार्ता हुई। स्वामी जी ने कहा कि श्री पुरी जी अद्भुत व्यक्तित्व के धनी हैं। उन्होंने कचरे के सुव्यवस्थित निस्तारण की योजना को गंभीरता, तत्परता और सक्रियता से सुनकर उस के योजना बनाने की बात कही।
स्वामी चिदानन्द सरस्वती जी ने कहा कि प्रत्येक शहर में अक्सर हमें कूड़े के पहाड़ तथा कूड़े से भरे गड्ढे दिखायी देते हैं। चूँकि कूड़े के अपघटन से मीथेन गैस का निर्माण होता है, जो कि अत्यंत ज्वलनशील होती है इसलिये तो इन ढेरों से लगातार धुआँ निकलते हुए दिखायी देता है। घर, स्कूल, रेस्तराँ, सार्वजनिक स्थान, बाजार आदि स्थानों से अत्यधिक मात्रा में ठोस कचरा उत्पादित होता है, जो कि लैंडफिल में पहुँचता है, जो भूमि तथा जल संसाधनों को दूषित करता हैं तथा प्लास्टिक तो कुल लैंडफिल का 80 प्रतिशत भाग होता है। ठोस कचरे से लगभग 10 विषाक्त गैसें विमुक्त होती हैं, जिनमें मीथेन गैस सबसे अधिक गंभीर है। इसका परिणाम ग्लोबल वार्मिंग के रूप में होता है। साथ ही भूमिगत जल प्रदूषण, भूमिगत जल रिसाव के कारण दूषित हो रहा है तथा लैंडफिल के समीप रहने वाले लोगों में व्यक्तिगत स्वास्थ्य समस्याएँ भी देखने को मिली हैं इसलिये कचरे के प्रबंधन का जैविक उपचार खोजना होगा जो प्रभावी होने के साथ ही पर्यावरण हितैषी भी हो।
स्वामी जी ने महान समाज सुधारक तथा राष्ट्रभक्त, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के तृतीय सरसंघचालक श्री बाला साहब देवरस जी की जयंती पर भावपूर्ण श्रद्धांजलि अर्पित करते हुये आज की गंगा आरती उन्हें समर्पित की। उन्होंने अस्पृश्यता के उन्मूलन हेतु अद्भुत कार्य किये। यूनाइटेड नेशन के अनुसार महिलाएं पहाड़ों के पर्यावरण संरक्षण और सामाजिक और आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। वे अक्सर पर्वतीय संसाधनों की प्राथमिक प्रबंधक, जैव विविधता की संरक्षक, पारंपरिक ज्ञान, स्थानीय संस्कृति की संरक्षक और पारंपरिक चिकित्सा विशेषज्ञ के रूप में कार्य करती है। अक्सर पुरुषों को वैकल्पिक आजीविका की तलाश में कहीं और पलायन करना पड़ता है परन्तु ग्रामीण महिलाओं एक प्रेरक शक्ति बनकर पर्वतीय अर्थव्यवस्थाओं के विकास में सक्रिय भूमिका निभाती हैं।
अंतर्राष्ट्रीय पर्वत दिवस, 2022 लैंगिक समानता को बढ़ावा देने का एक अवसर है और इसलिए सामाजिक न्याय और पर्वतीय आजीविका पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। पहाड़ दुनिया की 15 प्रतिशत आबादी का घर हैं तथा आधी मानवता को रोजमर्रा के लिए ताजा पानी उपलब्ध कराते हैं। सतत विकास के लिए पर्वतों का संरक्षण एक महत्वपूर्ण कारक है इसलिये हमें अपने कार्बन फुटप्रिंट को कम करना होगा ताकि प्राकृतिक खजाने को बचाया जा सके।

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