चंडीगढ़ : पंजाब के वित्त, योजना, आबकारी एवं कराधान मंत्री हरपाल सिंह चीमा ने शिक्षा से सम्बन्धित वस्तुओं पर जीएसटी में किसी भी तरह के वृद्धि को विद्यार्थियों के हितों के खिलाफ़ कदम बताते हुये पेंसिल, शार्पनरों पर जीएसटी दर की मौजूदा 12 से बढ़ाकर 18 प्रतिशत की करने के प्रस्ताव का विरोध किया है। श्री चीमा ने शनिवार को यहाँ वीडियो कान्फ्रेंसिंग के माध्यम से जीएसटी परिषद की 48वीं बैठक में हिस्सा लेते हुये केंद्र सरकार के इस कदम का विरोध किया। पंजाब के विरोध का अन्य राज्यों के प्रतिनिधियों ने भी समर्थन किया जिसके बाद इस प्रस्ताव को टाल दिया गया।
केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण की अध्यक्षता में हुई परिषद की बैठक में राज्य और देश दोनों के हितों को देखने वाली फिटमेंट कमेटी की अलग-अलग सिफ़ारिशों पर सहमति जताते हुये श्री चीमा ने इस पर अपने विचार रखे। पेट्रोल में मिलाने के लिए रिफायनरियों को आपूर्ति किये जाने वाले एथनॉल अल्कोहल के लिए जीएसटी दरों में बदलाव को लेकर एक अन्य सिफ़ारिश का विरोध करते हुये उन्होंने कहा कि इस सम्बंध में ईएनए के दुरुपयोग और कर चोरी रोकना एक बड़ी चुनौती होगी। उन्होंने इस सम्बन्ध में अपनी असहमति ज़ाहिर करते हुये उच्चतम न्यायालय की हाल ही में की गई टिप्पणी का हवाला देते हुए कहा कि पंजाब सरकार पहले ही ईएनए के ग़ैर-कानूनी कारोबार के विरुद्ध जंग लड़ रही है।
ई-वे बिल सम्बन्धी नियम 138 के उप-नियम (14) की धारा (डी) को हटाने सम्बंधी एक अन्य एजेंडे पर असहमत होते हुये पंजाब के वित्त मंत्री ने कहा कि इस कदम से राज्य की अंदरूनी आपूर्ति पर ई-वे बिल जारी करने की सीमा निर्धारित करने की शक्ति ख़त्म हो जायेगी। पंजाब की ओर से पहले ही इस सम्बन्ध में अनुरोध किया गया है कि कानूनी संशोधन कर हुये राज्यों को यह अधिकार दिया जाये कि वह ऐसी वस्तुएँ जो राज्य की अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण हों, पर अपनी मर्ज़ी अनुसार ई-वे बिल जारी करने की सीमा निर्धारित कर सकें। उन्होंने कहा कि राज्य के राजस्व के नज़रिए से ऐसा करना महत्वपूर्ण होगा। इस पर परिषद से इस पर यथास्थिति बनाये रखने पर सहमति दी।
