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मोदी ने किया फुटबॉल और पोप का ज़िक्र

शिलॉन्ग : पूर्व के स्कॉटलैंड के नाम से मशहूर मेघालय की खूबसूरत राजधानी शिलॉन्ग में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने फुटबॉल प्रेमियों और चर्च के अनुयायियों से भावनात्मक तारतम्य स्थापित किया तो उन्हें तालियों के रूप में गर्मजोशी भरा जवाब मिला।
श्री मोदी ने शिलॉन्ग में रविवार को पूर्वोत्तर परिषद (एनईसी) की स्वर्ण जयंती बैठक के बाद एक जनसभा को संबोधित किया। इस मौके पर मेघालय के राज्यपाल ब्रिगेडियर बी डी मिश्रा, मेघालय के मुख्यमंत्री कोनार्ड संगमा, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केन्द्रीय जहाजरानी मंत्री सर्बानंद सोनोवाल, केन्द्रीय कानून मंत्री किरण रिजिजू, केन्द्रीय पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जी किशन रेड्डी, केन्द्रीय राज्य मंत्री बी एल वर्मा, असम के मुख्यमंत्री हेमंत विश्व शर्मा, मणिपुर के मुख्यमंत्री एन बीरेन सिंह, मिजोरम के मुख्यमंत्री ज़ोरमथंगा, अरुणाचल प्रदेश के मुख्यमंत्री पेमा खांडू, त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा और सिक्किम मुख्यमंत्री प्रेम सिंह तमांग उपस्थित थे।
श्री मोदी ने अपने भाषण की शुरुआत फुटबाल विश्व कप टूर्नामेंट के साथ की। उन्होंने कहा, “ये संयोग ही है कि आज जब फुटबॉल वर्ल्ड कप का फाइनल हो रहा है, तब मैं यहां फुटबॉल के मैदान में ही फुटबॉल प्रेमियों के बीच में हूं। उस तरफ फुटबॉल की स्पर्धा चल रही है और हम फुटबॉल के मैदान में विकास की स्पर्धा कर रहे है। मुझे ऐहसास है कि मैच कतर में हो रहा है, लेकिन उत्साह और उमंग यहां भी कम नहीं है। और साथियों जब फुटबॉल के मैदान में हूं और फुटबॉल फीवर चारों तरफ है तो क्यों न हम फुटबॉल की भाषा में ही बात करें, फुटबॉल के उदाहरण से ही बात करें।”
उन्होंने कहा, “हम सबको मालूम है कि फुटबॉल में अगर कोई खेल भावना के विरूद्ध अगर कोई भी व्यवहार करता है। तो उसे रेड कार्ड दिखाकर बाहर कर दिया जाता है। इसी तरह पिछले 8 वर्षों में हमने नॉर्थ ईस्ट के विकास से जुड़ी अनेक रुकावटों को रेड कार्ड दिखा दिया है|”
प्रधानमंत्री ने कहा कि भ्रष्टाचार, भेदभाव, भाई-भतीजावाद, हिंसा, परियोजनाओं को लटकाना-भटकाना, वोट बैंक की राजनीति को बाहर करने के लिए हम ईमानदारी से प्रयास कर रहे हैं। लेकिन आप भी जानते हैं, देश भी जानता है। इन बुराईयों एवं बीमारियों की जड़ें बहुत गहरी हैं, इसलिए हम सबको मिलकर के उसे हटाकर के ही रहना है। हमें विकास के कार्यों को ज्यादा रफ्तार देने और ज्यादा प्रभावशाली बनाने में प्रयासों को अच्छा परिणाम भी नजर आ रहा है।
उन्होंने कहा कि यही नहीं, खेलों को लेकर भी केंद्र सरकार आज एक नए रुख के साथ आगे बढ़ रही है। इसका लाभ पूर्वोत्तर एवं यहां के मेरे नौजवानों, बेटे-बेटियों को हुआ है। देश का पहला खेल विश्वविद्यालय पूर्वोत्तर में है। आज पूर्वोत्तर में मल्टीपर्पज़ हॉल, फुटबॉल मैदान, एथलेटिक्स ट्रैक, ऐसी 90 परियोजनाओं पर काम चल रहा है। उन्होंने कहा, “आज शिलॉन्ग से मैं ये कह सकता हूं कि आज भले ही हमारी नज़र कतर में चल रहे खेल पर है, मैदान में विदेशी टीम हैं उन पर हैं, लेकिन मुझे मेरे देश की युवा शक्ति पर भरोसा है। इसलिए विश्वास से कह सकता हूँ कि वो दिन दूर नहीं जब हम भारत में ऐसा ही उत्सव मनाएंगे और तिरंगे के लिए चीयर करेंगे।”
श्री मोदी ने इसके बाद क्षेत्र में शांति, बिजली और संचार की आधुनिक सुविधाओं सहित के विकास के आठ आयामों पर चर्चा की और कहा कि पूर्वोत्तर देश की सुरक्षा और समृद्धि का द्वार है। इसके बाद उन्होंने शिलॉन्ग में ईसाई समुदाय की धार्मिक संवेदनाओं को स्पर्श करते हुए कहा, “पिछले साल मुझे वेटिकन सिटी जाने का अवसर मिला, जहां मेरी मुलाकात परम पावन पोप फ्रांसिस से हुई। मैंने उन्हें भारत आने का न्यौता भी दिया है। इस मुलाकात ने मेरे मन पर गहरा प्रभाव छोड़ा। हम दोनों ने उन चुनौतियों पर चर्चा की, जिनसे आज पूरी मानवता जूझ रही है। एकता और समरसता की भावना से कैसे सबका कल्याण हो सकता है, इस पर एकजुट प्रयासों के लिए सहमति बनी। इसी भाव को हमें सशक्त करना है।”
श्री मोदी ने पूर्वोत्तर में विकास की तेज़ धारा के ऐसे ही प्रवाहित होते रहने की कामना के साथ लोगों को आने वाले क्रिसमस के पर्व की शुभकामनाएं भी दीं। उन्होंने कहा, “पूर्वोत्तर में तेज़ विकास की ये धारा ऐसे ही प्रवाहित होती रहे, इसके लिए आपका आशीर्वाद हमारी ऊर्जा है। अभी कुछ ही दिनों में क्रिसमस का पर्व आ रहा है, ये त्यौहार आ रहा है। आप सभी को आज जब मैं पूर्वोत्तर आया हूं तो इसी धरती से सभी देशवासियों को, सभी मेरे पूर्वोत्तर के भाई-बहनों को आने वाले क्रिसमस के त्यौहार की अनेक-अनेक शुभकामनाए देता हूं। एक बार फिर आप सभी को बहुत-बहुत बधाई। खुबलेई शिबोन ! (खासी और जयंतिया में धन्यवाद) मितेला ! (गारो में धन्यवाद)।”

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