नैनीताल। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने ऊधमसिंह नगर के जसपुर स्थित ठाकुर रघुनाथ जी मंदिर की बहुमूल्य भूमि का गबन करने और बेचे जाने के मामले में प्रदेश सरकार को जांच रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिया है। साथ ही आरोपी तथा मंदिर के निष्कासित महंत को भी पक्षकार बनाने के निर्देश दिया है।
इस मामले को जसपुर निवासी मनेंद्र सिंह की ओर से दायर याचिका पर सुनवाई मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी और न्यायमूर्ति आर.सी. खुल्बे की युगलपीठ में हुई।
याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि ठाकुर रघुनाथ जी का मंदिर सन् 1860 में स्थापित हुआ था। इसे सन् 1994 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने सार्वजनिक मंदिर घोषित कर दिया था। तीन बीघे में स्थापित इस मंदिर के पास 20 बीघा भूमि भी है।
याचिकाकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया कि मंदिर की 20 बीघा भूमि को मंदिर के निष्काषित महंत तथा प्रशासन की सांठगांठ से गबन कर बेचा जा रहा। मंदिर के पूर्व महंत को 1994 में इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने हटा दिया गया था। इसके बावजूद मंदिर की भूमि पर उसी का कब्जा है। याचिकाकर्ता की ओर से मंदिर की भूमि पर काबिज अतिक्रमणकारियों को हटाने तथा मंदिर की सम्पत्ति को बचाने की की मांगे की गयी है। साथ ही भूमि तथा मंदिर की सरकारी समिति की निगरानी में देखरेख की मांग की गयी है।
ठाकुर रघुनाथ जी मंदिर की भूमि गबन मामले में उच्च न्यायालय ने मांगी रिपोर्ट
