भारत सरकार ने 26 दिसंबर को “वीर बाल दिवस” घोषित किया है , गुरु गोविंद सिंह जी के साहिबजादे जोरावर सिंह और साहिबजादे फतेह सिंह की महान शहादत के अवसर पर दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी द्वारा व्याख्यान एवं काव्य गोष्ठी का आयोजन
नई दिल्ली : भारत सरकार ने 26 दिसंबर को “वीर बाल दिवस” घोषित किया है, गुरु गोविंद सिंह जी के साहिबजादे जोरावर सिंह और साहिबजादे फतेह सिंह की महान शहादत के अवसर पर दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी द्वारा 23 दिसंबर 2022 को व्याख्यान एवं काव्य गोष्ठी का आयोजन किया गया । यह कार्यक्रम दिल्ली लाइब्रेरी बोर्ड के अध्यक्ष श्री सुभाष चंद्र कानखेड़िया की अध्यक्षता एवं महानिदेशक डॉ. रवींद्र कुमार शर्मा के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया ।

कार्यक्रम में वक्ता के रूप में डॉ. एम. एम. एस. बेदी, मीत प्रधान, गुरुद्वारा सिंह सभा, लाजवंती गार्डन, नई दिल्ली एवं पूर्व लाइब्रेरियन, इंदिरा गांधी शारीरिक शिक्षा एवं खेल विज्ञान संस्थान, दिल्ली विश्वविद्यालय, प्रसिद्ध कवि, पत्रकार, समाज सेवक एवं मदरलैंड वॉइज दैनिक समाचार पत्र के ब्यूरो चीफ़ श्री विजय गौड़ एवं प्रसिद्ध बाल कवि, साहित्यकार,शिक्षाविद एवं हिंदी की गूँज संस्था के राष्ट्रीय संयोजक श्री नरेंद्र सिंह नीहार उपस्थित रहे । गणमान्य अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन के साथ बाला प्रीतम बाल सेवक जत्था, हरिनगर की बाल कीर्तन मंडली द्वारा गुरु गोविंद सिंह को नमन करते हुए तथा उनके साहिबजादों द्वारा दी गई महान शहादत को श्रद्धा सुमन अर्पित करते हुए सबद कीर्तन प्रारंभ किया गया ।

शिक्षिका एवं निर्देशिका गगनदीप कौर ने प्रत्येक कीर्तन का अर्थ समझाते हुए सभा में उपस्थिति श्रोताओं का मार्गदर्शन किया तथा गुरु गोविंद सिंह जी एवं उनके सपूतों के महान बलिदान को कविता एवं कीर्तन के माध्यम से प्रस्तुत किया I श्रीमती उर्मिला रौतेला, सहायक पुस्तकालय एवं सूचना अधिकारी, दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी द्वारा मंच संचालन करते हुए कहा गया कि इतनी छोटी आयु में तो बच्चे छोटी-छोटी चीजों के लिए विचलित हो जाते हैं, किन्तु साहिबजादे जोरावर सिंह और साहिबजादे फतेह सिंह द्वारा अपने धर्म के नेक सिद्धांतों पर चलते हुए हँसते-हँसते अपने प्राण बलिदान कर देना अत्यंत महान एवं प्रेरणादायी है ।
कार्यक्रम की अध्यक्षता श्री सुभाष चंद्र कांखेड़िया, अध्यक्ष, दि.ला.बो. द्वारा गुरु महिमा पर दोहों के माध्यम से की गई । उन्होंने कहा कि हम गुरु का कितना भी गुणगान कर ले पर गुरु के बलिदान और उनकी महिमा का पूर्ण बखान कभी नहीं कर सकते । उन्होंने माता गुजरी जी को तथा उनके नौनिहालों को राष्ट्र के लिए न्यौछावर होने पर शत-शत नमन किया और इन बलिदानियों को अपने श्रद्धा सुमन अर्पित किये I
महानिदेशक डॉ. आर. के. शर्मा ने कार्यक्रम में उपस्थित सभी गणमान्य अतिथियों एवं श्रोतागणों का स्वागत कर वक्ताओं का परिचय एवं कार्यक्रम की रूप रेखा प्रस्तुत की । उन्होंने कहा कि यह क्षण सभी को भावुक कर देने वाला है। इस प्रकार के कार्यक्रमों को आयोजित करने हेतु मार्गदर्शन प्रदान करने के लिए दिल्ली लाइब्रेरी बोर्ड के अध्यक्ष श्री सुभाष चंद्र कांखेड़िया को उन्होंने हृदय से धन्यवाद दिया । उन्होंने बताया कि सिख धर्म ने राष्ट्र हित के लिए कई कुर्बानियां दी हैं और यह सैदव से ही हमारे लिए प्रेरणास्रोत है । उन्होंने कहा कि गुरु गोबिंद सिंह जी और उनके साहिबजादे जोरावर सिंह और साहिबजादे फतेह सिंह सभी के लिए सदैव वंदनीय रहेंगे ।
वक्ता डॉ. एम. एम. एस. बेदी ने सिख समुदाय की ओर से माननीय प्रधानमंत्री जी को गुरु गोविंद सिंह जी के साहिबजादे जोरावर सिंह और साहिबजादे फतेह सिंह की महान शहादत के अवसर पर 26 दिसंबर को “वीर बाल दिवस” के रूप में घोषित करने हेतु धन्यवाद अर्पित किया । उन्होंने बताया कि अन्याय के आगे सर ना झुकाना और सबके हितों के लिए कुर्बान हो जाना साहिबजादे जोरावर सिंह और साहिबजादे फतेह सिंह के खून में था । इनके दादा गुरु तेगबहादुर जी को मुगल शासक औरंगजेब ने इस्लाम कबूल करने के लिए कहा था, जिसको न मान कर उन्होंने हंसते-हंसते जान देना चुना था । इनके पर-दादा गुरु अर्जन देव जी ने जोर जुलम के खिलाफ अपनी आवाज उठाते हुए शरणागत की रक्षा के लिए स्वयं को बलिदान का दे देना स्वीकार किया । यह हमारे लिए फक्र की बात है कि आज के ही दिन दोनों बड़े साहिबजादों बाबा अजित सिंह व बाबा जुझार सिंह ने मुगल साम्राज्य के खिलाफ लड़ते हुए चमकौर युद्ध भूमि में अपने प्राण न्यौछावर किए थे । साहिबजादे जोरावर सिंह और साहिबजादे फतेह सिंह भी देखने में छोटे थे परंतु इनके हौसले एवं काम बहुत बड़े थे । मुगल बादशाह औरंगज़ेब के सूबेदार वज़ीर खान ने इन बच्चों को इस्लाम ना अपनाने पर जिंदा दीवारों में चिनवा दिया । इन बच्चों के हौसले इतने बुलंद थे की इन्होंने हँसते हँसते “जो बोले सो निहाल सत श्री अकाल” कहते हुए अपने प्राण बलिदान कर दिए । छोटे साहिबजादों के अंतिम संस्कार के लिए दीवान टोडर मल ने अपनी जमीन जायदाद बेचकर अत्याचारी मुग़ल साम्राज्य से जमीन खरीदी ।
प्रसिद्ध कवि श्री विजय गौड़ ने कविता के माध्यम से बताया कि देश भक्ति केवल मनुष्य में नहीं पशु पक्षियों में भी होती है । उन्होंने अपने काव्य पाठ द्वारा सभागार में देश प्रेम, त्याग और बलिदान के भाव का उद्बोधन किया । उन्होंने गुरु गोविंद सिंह जी, बच्चों और महिलाओं पर बहुत खुबसूरत तरह से विषय को प्रतिपादित करते हुए काव्य रचनाएं प्रस्तुत की I आग लगी है इस वृक्ष में जलने लगे पात, सिद्धों की सिद्धि क्यों टूटी… भगवान् बसा है नारी में आदि सुन्दर रचनाओं से श्रोताओं को भाव विभोर कर दिया I
जाने माने कवि श्री नरेंद्र सिंह नीहार ने बताया कि जुल्म करने वाला सदैव जीवित नहीं रहता परंतु जुल्मोसितम के खिलाफ आवाज उठाने वाला और राष्ट्र हित के लिए कुर्बानी देने वाला सदैव के लिए अमर हो जाता है I उन्होंने सच्ची कथा सुनाने आया बच्चों के बलिदान की, जोरावर सिंह और फ़तेह सिंह के बलिदान की , बचपन में सिंहों के दांत गिने, यौवन साहस की चट्टान बने, होठों पर जन-गण मन हाथों पर तिरंगा है, आदि भावपूर्ण कविताएं सुनाकर सभी श्रोताओं को देश भक्ति के भावों से आच्छादित कर कार्यक्रम को अत्यंत रोचक बना दिया I अंत में उन्होंने गुरु देव एवं उनके साहिबजादों के बलिदान को सम्मान देते हुए उनके संकल्प को आगे बढ़ाने और अपने राष्ट्र के विकास हेतु प्रगतिशील होने के लिए सभी से आह्वाहन किया I इस अवसर पर डॉ. अनामिका द्वारा भी गुरु की महिमा का गुणगान कर कविता प्रस्तुत की गई ।
इस अवसर पर मंचासीन अतिथियों के साथ सभागार में मीडिया से जुडी डॉ. अनामिका, डॉ. ममता श्रीवास्तव, गुरुद्वारा प्रबंधक समिति, लाजवंती गार्डन, दिल्ली के अध्यक्ष एवं पदाधिकारी, दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी के अधिकारी , कर्मचारी, पाठक, विद्यालयों के बच्चे उपस्थित थे I अंत में उर्मिला रौतेला, सहायक पुस्तकालय एवं सूचना, दि.पा. ला. द्वारा सभी आमंत्रित अतिथियों, बच्चों, अधिकार्रियों, कर्मचारियों एवं उपस्थित जनों को धन्यवाद ज्ञापित करने के साथ कार्यक्रम सम्पन्न हुआ I
