जम्मू : जम्मू-कश्मीर के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) दिलबाग सिंह ने बीते साल को सुरक्षा के मोर्चे पर सबसे शांतिपूर्ण वर्ष बताते हुए शनिवार को ‘मिशन जीरो टेरर 2023’ की वकालत की। सिंह ने यहां एक पारंपरिक ईयर-एंड प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए कहा कि 2022 में सुरक्षा के मोर्चे पर आंकड़े स्पष्ट रूप से इंगित करते हैं कि हमारे सुरक्षा बलों ने कानून और व्यवस्था की स्थिति बनाए रखने के अलावा आतंकवादियों की संख्या को कैसे समाप्त किया।
उन्होंने कहा कि ‘शून्य आतंक’ की दिशा में प्रगति देखी जा रही है, लेकिन फिर भी आने वाले वर्ष में बहुत कुछ करने की आवश्यकता है। उन्होंने लोगों की प्रशंसा करते हुए कहा कि उनके सहयोग और मदद के बिना यह असंभव था। जनता के समर्थन से हमने आतंकवाद के जाल पर अंकुश लगाया और यह 2023 में भी जारी रहेगा। डीजीपी ने पिछले चार साल की तुलना करते हुए कहा कि 2022 में 56 विदेशियों समेत 186 आतंकी मारे गए। उन्होंने कहा कि इस साल 100 युवा आतंकवादी संगठनों में शामिल हुए, जिनमें से 17 को गिरफ्तार किया गया और अन्य विभिन्न मुठभेड़ों में मारे गए जबकि 18 बचे हैं और सुरक्षा बल उनके पीछे हैं।
उन्होंने कहा कि मिशन ‘जीरो टेरर’ और 2023 में जम्मू-कश्मीर में कहीं भी मौजूद आतंकवादी इको-सिस्टम का सफाया करना सुरक्षा बलों का मुख्य फोकस होगा। उन्होंने कहा,“इस साल मारे गए अधिकांश आतंकी आतंकवादी संगठन लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद से संबद्ध थे।” उन्होंने कहा कि वर्ष में 146 आतंकवादी गिरोहों का भंडाफोड़ किया गया और एके 47 राइफल, 275 पिस्तौल, 354 ग्रेनेड, 61 ग्रेनेड, 61 आईईडी सहित 188 हथियार भी जब्त किए गए।
उन्होंने जम्मू क्षेत्र में ड्रोन द्वारा हथियार गिराने की कोशिश को सफलतापूर्वक विफल करने और भारी मात्रा में हथियार जब्त करने के लिए पुलिस और अन्य बलों को बधाई दी। डीजीपी ने नागरिक और सुरक्षा बलों की हत्या पर कहा कि पिछले वर्षों की तुलना में 14 पुलिस और 17 अर्ध-सैनिक बल के जवान मारे गए, जो अब तक सबसे कम है, जबकि नागरिक भी कम हताहत हुए थे तथा कानून व व्यवस्था की केवल 24 घटनाओं की सूचना मिली थी।
