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करोड़ों रुपये के भ्रष्टाचार के मामले में 23 लोगों को सजा

बड़वानी : मध्यप्रदेश के बड़वानी स्थित एक न्यायालय द्वारा आज पारित निर्णय में सेंधवा जनपद पंचायत के अंतर्गत 5 करोड से अधिक की मनरेगा राशि के गबन के मामले में तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी, बैंक शाखा प्रबंधक, 10 पंचायत सचिवों व 5 सरपंचों समेत 23 लोगों को 7 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई गई है।
आधिकारिक जानकारी के अनुसार बड़वानी के प्रथम अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश कैलाश प्रसाद मरकाम ने दिए अपने फैसले में सेंधवा जनपद पंचायत के तत्कालीन मुख्य कार्यपालन अधिकारी लाखन सिंह राजपूत, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया शाखा मालवन के प्रबंधक राजेश हड़के, पंचायत इंस्पेक्टर रमेश कर्मा, फर्म संचालक तथा भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के पूर्व पार्षद गोपाल गोयल, विकास खंडेलवाल, खाता धारक विजय जैन व प्रकाश चंद पालीवाल तथा 10 ग्राम पंचायत सचिवों व एक महिला सरपंच समेत पांच सरपंचों को सात-सात वर्ष के सश्रम कारावास से दंडित किया है।
लाखन सिंह राजपूत अपनी पुत्रवधू के साथ जमीन संबंधी धोखाधड़ी के मामले में पूर्व से ही खरगोन जिले के बड़वाह उप जेल में निरुद्ध हैं। इस मामले में 25 आरोपी थे, किंतु दो की मृत्यु हो चुकी है। लोक अभियोजक हेमेंद्र कुमरावत ने बताया कि एक शिकायत के जांच प्रतिवेदन के आधार पर 23 मई 2012 को बड़वानी जिले के वरला थाना क्षेत्र में धारा 409 420 467 468 471 120 बी तथा भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत 25 आरोपियों के विरुद्ध प्रकरण दर्ज किया गया था।

इसमें पाया गया था कि सेंधवा जनपद पंचायत की 23 ग्राम पंचायतों के भारतीय स्टेट बैंक मालवन में फर्जी खाते खुलवा कर इसमें मनरेगा के 5 करोड़ 21 हजार 50 हजार रुपये डाले गये थे । इस राशि को तीन फर्जी फर्म संचालकों के खाते में स्थानांतरित कर आरोपियों द्वारा आहरित कर लिया गया था। मनरेगा राशि से किसी भी प्रकार का कार्य संपादित नहीं किया गया था।

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