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अब तक आतंकवाद की मौजूदगी दुखद

श्रीनगर : जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और सांसद डॉ फारूक अब्दुल्ला ने सोमवार को कहा कि यह बहुत दुखद है कि जम्मू कश्मीर में अभी तक आतंकवाद मौजूद है जिसके कारण निर्दोष लोग मारे जा रहे हैं। अब्दुल्ला ने राजौरी की घटना पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि यह दुख की बात है कि जम्मू कश्मीर में अभी भी आतंकवाद मौजूद है और किसी भी धर्म के निर्दोष लोगों को निशाना बनाया जा रहा है। गौरतलब है कि आतंकवादियों ने रविवार शाम चार लोगों को लक्षित करते हुए हत्या कर दी।
फारूक ने श्रीनगर में मीडियाकर्मियों से कहा, “आतंकवाद रूपी बीमारी अब फैल चुकी है और यह कुछ निहित स्वार्थी लोगों द्वारा पूरे देश में फैलाई जा रही नफरत का परिणाम है। हिन्दू और मुसलमान को बांटा जा रहा है। इसके लिए कौन जिम्मेदार है और कौन इस नफरत को बढ़ावा दे रहा है।” उन्होंने सवाल किया, “उस हिंदू परिवार में क्या बचा था जो मारे गए और जो कश्मीरी पंडित दक्षिण कश्मीर के शोपियां जिले में मारे गए, उनका क्या दोष था।’’
उन्होंने कहा कि देश के गृह मंत्रालय को आतंकवाद की समाप्ति का रास्ता निकालना चाहिए। उन्होंने कहा कि जो भी यह अमानवीय काम कर रहा है वह विनाश की राह पर चल रहा है। उन्होंने कहा कि इससे कुछ प्राप्त नहीं होगा, सीमाएं कभी नहीं बदली जाएंगी, बल्कि तबाही और नफरत को बढ़ावा मिलेगा और हमें इस नफरत को देश से समाप्त करने का रास्ता खोजना होगा। उन्होंने कहा, “आज नैनीताल में मुसलमानों को बेघर किया जा रहा है और उनके घर बर्बाद किए जा रहे हैं। इसके लिए कौन जिम्मेदार है, क्या देश इसी नफरत के साथ आगे बढ़ेगा और क्या किसी को इसकी चिंता नहीं है।”
फारूक ने कहा, “जब तक हम यह नहीं सोचते कि भारत सभी धर्म, जाति, पंथ और भाषा से संबंधित है और जब तक सभी एकजुट नहीं होते, तब तक देश न तो कभी व्यवस्थित होगा और न ही विकसित होगा।” उन्होंने कहा कि लोगों में डर उत्पन्न होगा और इस डर को खत्म करने के लिए सभी को या तो विपक्ष में काम करना होगा या सत्ता पक्ष में, देश को बचाने के लिए सभी को एक चलना होगा।
इस बीच, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष महबूबा मुफ्ती ने राजौरी हत्याकांड पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए ट्वीट किया, “हम इस कायरतापूर्ण हमले की निंदा करते हैं और उनके परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हैं। भाजपा के शासन में होने और आतंकवाद को समाप्त करने वाले उनके झूठे दावों के बावजूद, हिंसा निरंतर जारी है और अगर जम्मू कश्मीर में निर्वाचित सरकार होती, तो मीडिया उन्हें अंगारों पर घसीट रहा होता।”

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