- व्यासपीठ द्वारा राधावल्लभ के सहस्त्रों नामों का आव्हान
- कलियुग के अंतिम चरण का किया विस्तार से ज़िक्र
- साप्ताहिक संगीतमय श्रीमद्भागवत कथा का समापन
संवाददाता /गौरवशाली भारत
नाॅंगल चौधरी : थाना समीप कटला मंडी में आयोजित साप्ताहिक श्रीमद् भागवत कथा का समापन सातवें दिन आचार्य हित प्रेम अगाधा शरण महाराज द्वारा अपने वृत्तांत में कृष्ण सुदामा का जिक्र करते हुए बताया कि भगवान किसी भी संबंध को बहुत ही अच्छी प्रकार से निभाते हैं। चाहे वह लघुता हो चाहे श्रेष्ठता हो भागवत कथा का विश्राम दिवस में श्री सुखदेव जी महाराज ने कलियुग की स्थिति का भी वर्णन किया। उन्होंने बताया जिस समय चरम पर कलयुग आएगा तब संबंध मर्यादा संस्कार मानवता पवित्रता सभी नष्ट होती चली जाएंगी। जिसके लिए भगवान पुन: प्रथ्वी पर कल्की अवतार धारण करने के लिए पधारेंगे। अधर्म को नष्ट कर धर्म की पुन: स्थापना करेंगे।

कथा विश्राम के सातवें दिन मुख्य अतिथि एवं विशिष्ट अतिथि स्वरूप पहुंचे भारत विकास परिषद के अध्यक्ष जगदेव शर्मा, सेवानिवृत्त अध्यापक रविन्द्र चौधरी, अध्यापक कुमुद किशोर शास्त्री समेत कथा में विशेष सहयोगी एवं यजमान स्वरूप काॅपरेटिव बैंक से सेवानिवृत्त शिम्बू दयाल सुलोदिया, सेवानिवृत्त अनुभाग अधिकारी शिव शंकर शर्मा, मूकेश भारद्वाज, उप चेयरमैन मुकेश शर्मा, गोपी बंसल, कविता, अभिषेक, अनुराग, यशु, सहित अन्य गणमान्य उपस्थित रहे।

साप्ताहिक श्रीमद् भागवत कथा में विशेष प्रसाद स्वरुप सहयोग में नोएडा दिल्ली से पुष्कर दत्त अग्रवाल एवं नाँगल चौधरी से श्याम सुंदर अग्रवाल द्वारा प्रसाद वितरण का दायित्व निर्वहन करते हुए पुण्य लाभ प्राप्त किया। राधा कृष्ण किरदार में जिन बच्चों ने भूमिका निभाई उनमें दिक्षा, पलक, मानवी, देवयानी और कथा समापन दिवस में कृष्ण सुदामा की सुंदर झांकी की भूमिका में सुदामा बने मयंक अग्रवाल, कृष्ण बनी अंतिम रत्न और राधा का किरदार में दिक्षा रत्न ने श्रीमद्भा भागवत पुराण श्रोता श्रदालुओं को अपने अभिनय एवं नृत्य से मंत्रमुग्ध किया।

भागवत कथा के सप्तम दिवस समापन में सैकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति देखने को मिली। इस दौरान सहस्त्र दीपदान का भी आयोजन किया गया। बुधवार को कथा पंडाल में ओंकार की रचना करके ग्यारह सौ दीपक भी प्रज्वलित किए गए। गुरुवार सुबह हवन-पूजन सहित सनातन धर्म पारम्परिक मंत्रोच्चार द्वारा आहूति प्रस्तुति सहित प्रसाद वितरण के साथ साप्ताहिक श्रीमद् भागवत कथा का समापन सर्वे भवन्तु सुखिनः मंत्र से सम्पन्न किया गया।
