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कथित धर्मांतरण को लेकर आदिवासियों का बस्तर बंद

जगदलपुर : छतीसगढ़ के नारायणपुर जिले में कथित धर्मांतरण को लेकर सर्वआदिवासी समाज के लोगों ने आज बंद का आह्वान किया। बस्तर सम्भाग से सातों जिले कोंडागाव, बस्तर, नारायणपुर, कांकेर, बीजापुर, दंतेवाडा और बीजापुर पूर्ण तरह से बंद रहे। वहीं, कई जगह चकाजाम भी किया गया। आदिवासियों के गिरफ्तारी और धर्मांतरण के मामले को लेकर आज बंद का आह्वान किया गया। बंद को लेकर पुलिस और प्रशासन अलर्ट में दिखी। चप्पे चप्पे पर पुलिस के जवानों को तैनात किया गया। संभाग के सभी जिलों में बंद का असर देखा गया। सुबह से दुकाने बंद थी।

आदिवासी समाज के लोग रैली निकाल बंद करने की अपील भी कर रहे थे। मामले में आदिवासी नेताओं का कहना है की नारायणपुर पुलिस ने पूरे मामले में एक तरफा कार्रवाई कर रही है। चुन चुनकर आदिवासियों की गिरफ्तार किया जा रहा है, जबकि इस मामले में मारपीट करने वाले आरोपियों को पुलिस अब तक गिरफ्तार नहीं कर सकी है।
दरअसल, कथित धर्मांतरण को लेकर छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में पिछले एक महीने से दो पक्षों के बीच घमासान मचा हुआ है। दोनों ही पक्षों के लोगों के बीच संघर्ष जारी है और कई लोग घायल भी हो गए हैं, लेकिन पिछले दिनों इस जिले के अंदरूनी गांव में हुए दो पक्षों के बीच मारपीट से हालात काफी बिगड़ गए। आलम यह है कि एक पक्ष के लोगों को अपनी जान बचाने के लिए जंगलों और अपने रिश्तेदारों के घरों का सहारा लेना पड़ रहा है। उनके घरों को दूसरे पक्ष के लोगों ने तहस-नहस कर दिया है।
वहीं छह से भी ज्यादा धार्मिक स्थलों में तोड़फोड़ की गयी है। यही नहीं महिलाओं पुरुषों, बुजुर्गों की भी डंडे लाठी से पिटाई कर दी गई है, तो दूसरी तरफ नारायणपुर में आदिवासी समुदाय की तरफ से की जा रही तोड़फोड़ को रोकने गई पुलिस टीम पर हमला कर दिया गया, जिसमे जिले के पुलिस अधीक्षक सदानंद कुमार के सिर पर गंभीर चोटें आई। इस मामले में अब तक 22 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया गया है और पांच लोगों को न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया गया है।

वहीं, इन हुड़दंग मचाने वाले लोगों में नारायणपुर के भाजपा जिला अध्यक्ष रूपसाय सलाम का भी नाम सामने आया है, जिसे सोमवार देर रात्रि ही पुलिस ने हिरासत में ले लिया और कल उसे न्यायालय में पेश कर जेल भेज दिया है। अभी भी सुरक्षा के लिहाज से शहर सहित आसपास के इलाके में करीब 5 हजार जवानों की तैनाती की गई है। शांति नगर और बंगला पारा वार्ड में हालात सबसे ज्यादा खराब थे।

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