चेन्नई : मद्रास उच्च न्यायालय ने गुरुवार को तमिलनाडु के राज्यपाल आर.एन.रवि को अयोग्य ठहराने की याचिका को सुनवाई योग्य नहीं बताते हुये खारिज कर दिया। याचिका में राज्यपाल होते हुये श्री रवि के लाभ का पद धारण करने की बता कही गयी थी। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश टी. राजा और न्यायमूर्ति डी.भरत चक्रवर्ती की पीठ ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 361 के तहत राज्यपाल को प्राप्त प्रतिरक्षा (इम्युटी) के मद्देनजर राज्यपाल के खिलाफ रिट याचिका नहीं हो सकती।
उच्च न्यायालय रजिस्ट्री को रिट संख्यांकित करने का निर्देश देने की याचिका को खारिज करते हुए पीठ ने उच्चतम न्यायालय और विभिन्न उच्च न्यायालयों के निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि अदालतें राज्यपाल के पदों पर संविधान द्वारा प्रदत्त विशेषाधिकार में हस्तक्षेप नहीं कर सकतीं। पीठ ने यह भी कहा कि संविधान में ऐसा कोई प्रावधान नहीं है जिससे राज्यपाल को अयोग्य ठहराया जा सके।
रवि के राज्यपाल रहते पुडुचेरी में फाउंडेशन ऑरोविले के बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष के रूप काम करने पर सवाल उठाते हुये याचिका दायर की गयी थी। थानथाई पेरियार द्रविड़ कज़गम के पदाधिकारी एम.कन्नदासन ने अपनी याचिका में कहा है कि संविधान ने राज्यपाल को एक साथ दो पद धारण करने से प्रतिबंधित कर दिया है। इसलिए उन्हें अयोग्य घोषित किया जाना चाहिए।
जब 15 दिसंबर, 2022 को दाखिले के लिए याचिका आई तो खंडपीठ ने, अपना आदेश सुरक्षित रखते हुए आश्चर्य जताया कि अदालत उन्हें नोटिस कैसे दे सकती है। राज्यपाल जब संविधान के अनुच्छेद 361 में स्पष्ट रूप से कहा गया है कि राष्ट्रपति और राज्यपाल उनके कार्यालय की शक्तियों और कर्तव्यों का प्रदर्शन के लिए किसी भी अदालत के प्रति जवाबदेह नहीं होंगे।
