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मंदी से उबर नहीं पा रहा है भदोही का कालीन कारोबार

भदोही : कालीन के हब के तौर पर देश में विख्यात उत्तर प्रदेश में भदोही जिले का परंपरागत उद्योग मंदी की मार से जूझ रहा है। कारोबार से जुड़े उद्यमी और बुनकरों का कहना है कि दो साल तक कोरोना महामारी के कारण कालीन की मांग में गिरावट दर्ज की जा रही थी जबकि अब रूस और यूक्रेन के बीच जारी युद्ध ने उद्योग पर प्रतिकूल प्रभाव डाला है। नतीजन, जर्मनी के हैनोवर शहर में 12 जनवरी से सजने वाले कालीन मेला में भारतीयों की उपस्थिति पिछले सालों की तुलना में आधी से भी कम रहने के आसार हैं।
कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) की प्रशासनिक समिति के युवा सदस्य रोहित गुप्ता ने यूनीवार्ता से कहा कि वर्ष 2021-22 में कोरोना काल के चलते जर्मनी के हैनोवर शहर में कालीन मेला नहीं लगा था जिससे देश के कालीन निर्यातकों को भारी नुकसान उठाना पड़ा था। मेले में भदोही, मिर्जापुर, पानीपत, आगरा, जयपुर समेत पूरे भारत से लगभग 400 कालीन निर्यातक शिरकत करते हैं। इस बार 12 से 15 जनवरी तक हैनोवर शहर में दुनिया का सबसे बड़ा कालीन महाकुंभ का मेला सजने जा रहा है लेकिन इस बार भी यूक्रेन और रूस के बीच जारी युद्ध का असर कालीन मेले पर पड़ा है। इस मेले में नाम मात्र भारत से निर्यातक पहुंच रहे हैं।
श्री गुप्ता ने बताया कि सीईपीसी के जरिये महज 135 निर्यातक ही जर्मनी के हैनोवर शहर कालीन मेला महाकुंभ में पहुंच रहे हैं जबकि पहले हैनोवर शहर में लगने वाले मेले में लगभग 400 निर्यातक लेकर पहुंचते थे। कालीन निर्यातक उमेश कुमार गुप्ता उर्फ मुन्ना भईया ने बताया कि कोरोना काल में दो साल कालीन मेला जर्मनी के हैनोवर शहर में नहीं लगा था जिसकी वजह से एक हजार करोड रूपये के़ कालीन कारोबार का नुकसान हुआ था।

भदोही व मिर्जापुर कालीन परिक्षेत्र में दस लाख के करीब श्रमिक प्रत्यक्ष अथवा अप्रत्यक्ष तौर पर कालीन व्यवसाय से अपनी रोजी रोटी चला रहे थे जिसमें अकेले साढ़े तीन लाख महिलाएं काम करती थी लेकिन मंदी के चलते हजारों की तादाद में श्रमिक बंगाल, उड़ीसा, नेपाल, बिहार, छत्तीसगढ़ स्थित अपने घरों काे लौट चुके हैं वहीं कुछ मजदूरों ने बुनाई छोड़कर दूसरे व्यवसाय में लग गये हैं।
उन्होने बताय कि इस बार भी जिले के कालीन कारोबार को हजारों करोड़ रूपये का नुकसान का अनुमान है। वैसे तो कालीन कारोबार से अन्य प्रदेशो के जिले जैसे पानीपत, आगरा और जयपुर भी बुरी तरह प्रभावित हुये हैं और निर्यात में भारी गिरावट के आसार हैं।

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