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प्रकृति के दोहन से आए कई संकट

भोपाल : शिवराज सिंह चौहान ने आज कहा कि भौतिक प्रगति की चाहत में प्रकृति के अंधाधुंध दोहन के चलते आज हम क्लाइमेट चेंज और ग्लोबल वार्मिंग जैसे संकट का सामना कर रहे हैं।
चौहान ने यहां जी-20 के अंतर्गत थिंक-20 की दो दिवसीय बैठक के प्रथम सत्र का उद्घाटन करते हुए अपने संबोधन में ये बात कही। इस अवसर पर नीति आयोग के उपाध्यक्ष सुमन बेरी, मध्यप्रदेश नीति आयोग के प्रोफेसर सचिन चतुर्वेदी और देश-विदेश से आए बुद्धिजीवी व विषय विशेषज्ञ भी उपस्थित रहे।
चौहान ने कहा कि भारत ने हजारों वर्ष पहले कहा कि एक ही चेतना सब में है। यह चेतना केवल मनुष्य मात्र में नहीं प्राणियों में भी है, इसीलिए भारत में गो पूजा से लेकर प्रकृति पूजा तक की जाती है। भारत ने कहा कि आत्मवत सर्वभूतेषु, अपने जैसा सबको मानो।
उन्होंने दूरदराज से आए अतिथियों से कहा कि मध्यप्रदेश टाइगर स्टेट है। यहां 11 टाइगर पार्क हैं। उन्होंने सभी से मध्यप्रदेश का वन्य जीवन देखने का आग्रह भी किया।
चौहान ने कहा कि हमें प्रकृति का दोहन करना चाहिए, शोषण नहीं। दोहन का अर्थ है वृक्ष में फल लगे हैं, तो उन्हें तोड़ कर खाए, लेकिन यदि पेड़ ही काट दें तो यह होगा शोषण। मानवता के कल्याण के लिए प्रकृति का संरक्षण आवश्यक है। हम सभी ने भौतिक प्रगति की चाह में प्रकृति का दोहन किया, जिसके कारण आज हम क्लाइमेट चेंज और ग्लोबल वार्मिंग के संकट का सामना कर रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश में जलाभिषेक अभियान चला कर तय किया गया कि गाँव का पानी गाँव में और खेत का पानी खेत में रोकेंगे। जनता के सहयोग से लगभग साढ़े चार लाख वॉटर बॉडीज बनाईं जो वॉटर रिचार्जिंग का काम कर रहीं हैं।
उन्होंने कहा कि सबके लिए जो न्यूनतम आवश्यकताएं हैं, पूरी हों। इसके लिए संघर्ष नहीं समन्वय, युद्ध नहीं, शांति। सर्ववाइल ऑफ द फिटेस्ट जंगल का कानून है। जो कमजोर है, उसको भी आगे लाने की कोशिश हो। केवल जी-20 ही नहीं, दुनिया के सभी देश एक साथ आ जायें और साझा विचार करें कि कैसे सबका कल्याण हो। उन्होंने विश्वास जताया कि यह बैठक इस दिशा में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगी।

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