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गठबंधन के मुद्दे पर मोथा-भाजपा में नहीं बनी बात

अकेले चुनाव लड़ेगी टिपरा

अगरतला : अमित शाह ने गुरुवार को टिपरा मोथा के नेताओं से मिले बिना ग्रेटर टिपरालैंड की मांग को खारिज कर दिया और कहा कि यह महज ‘भावनात्मक दावा’ है। इसके साथ ही सबसे मजबूत क्षेत्रीय गठबंधन टिपरा मोथा के साथ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के बहुप्रतीक्षित गठबंधन पर बात नहीं बन सकी।
उल्लेखनीय है कि टिपरा मोथा के नेताओं को ग्रेटर टिपरालैंड मुद्दे पर चर्चा करने के लिए बुधवार को गृह मंत्रालय के साथ बैठक के लिए आमंत्रित किया गया था।
मोथा सुप्रीमो एवं शाही उत्तराधिकारी प्रद्योत किशोर देववर्मन 16 फरवरी को होने वाले विधानसभा चुनाव में टिपरा के साथ गठबंधन चाहने वाले दलों से अपनी मांग के लिए लिखित प्रतिबद्धता की मांग कर रहे हैं।
प्राप्त रिपोर्ट के मुताबिक त्रिपुरा के मौजूदा क्षेत्र से पृथक ग्रेटर टिपरालैंड की मांग का समर्थन करने के लिए कोई भी पार्टी सहमत नहीं हुई। ग्रेटर टिपरालैंड पर चर्चा के लिए बुधवार को गृह मंत्रालय ने पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को दिल्ली आमंत्रित किया था।
मोथा के अध्यक्ष बिजॉय हरंगखल ने बताया कि उनके समक्ष जनजाति के विकास के लिए कुछ पहल करने के वादे का मसौदा पेश किया गया था और औपचारिक चर्चा के लिए आगे बढ़ने से पहले उनकी प्रतिक्रिया मांगी गई थी।
उन्होंने कहा, “हमने मसौदे की सामग्री की जांच की है और हमारी मांग के संबंध में कुछ भी नहीं मिला है। इसमें स्वदेशी लोगों के सामाजिक-आर्थिक, सांस्कृतिक और शैक्षिक विकास के लिए वादे किये गये थे। ऐसा लगता है कि 2018 के चुनावों में इंडिजिनस पीपुल्स फ्रंट ऑफ त्रिपुरा (आईपीएफटी) के साथ भाजपा की प्रतिबद्धता के तहत सामाजिक-आर्थिक, सांस्कृतिक और भाषाई विकास के लिए तौर-तरीकों की जो समिति पहले बनाई गई थी। यह उसी का हिस्सा है, इसलिए, हम सहमत नहीं हैं। “
मोथा नेताओं ने जब इस मुद्दे पर केंद्रीय गृह मंत्री शाह के साथ बात करने की इच्छा व्यक्त की, तो उन्होंने कथित तौर पर उन्हें एक संदेश भेजा कि वे ग्रेटर टिपरालैंड पर चर्चा करने के इच्छुक नहीं हैं। शाह ने इस मांग को ‘अवास्तविक’ करार दिया और कहा कि यदि कोई चर्चा होगी, तो गृह मंत्रालय के मसौदा प्रस्ताव पर होगी।
मोथा के प्रवक्ता एंटनी देववर्मा ने कहा कि वे शुक्रवार को 60 सदस्यीय राज्य विधानसभा में अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित सभी 20 सीटों और जनजाति के लिए आरक्षित 10 सीटों के अलावा भी अपने उम्मीदवारों की घोषणा करेंगे और टिपरा अकेले चुनाव लड़ेगी।
वहीं कांग्रेस तथा मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी ने भाजपा को सत्ता से उखाड़ फेंकने के लिए साथ मिलकर चुनाव लड़ने का संकेत दिया है।

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