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पर्चा लीक होने के मामले में कांग्रेस ने उठाए सवाल

भोपाल : मध्यप्रदेश नेशनल हैल्थ मिशन (एनएचएम) के तहत नर्सिंग स्टाफ भर्ती परीक्षा के पेपर लीक होने (गोपनीयता भंग होने) की घटना सामने आने के बाद इस मामले में मुख्य विपक्षी दल कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं।
प्रदेश कांग्रेस के मीडिया विभाग के अध्यक्ष के के मिश्रा ने ट्वीट के जरिए इस संबंध में मीडिया में आयी खबर को पोस्ट करते हुए कहा कि मध्यप्रदेश में फिर घोटाला। एनएचएम की परीक्षा का पर्चा पहले ही लोगों तक पहुंचा। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि यह जंगलराज नहीं तो और क्या है।
इसके पहले विधानसभा में विपक्ष के नेता डॉ गोविंद सिंह ने भी ट्वीट के माध्यम से कहा कि पेपर लीक होने के कारण नर्सिंग परीक्षा निरस्त कर दी गयी है। इस वजह से प्रतिभागियों को जो क्षति हुयी है, उसकी पूर्ति राज्य सरकार को करना चाहिए और एक माह के भीतर फिर से परीक्षा आयोजित कराना चाहिए, ताकि प्रतियोगियों को जल्द से जल्द रोजगार मिल सके।
ग्वालियर पुलिस की अपराध शाखा ने मंगलवार को एनएचएम की परीक्षा से जुड़े ”पेपर लीक” मामले में अंतर्राज्जीय गिरोह का पर्दाफाश करते हुए इस मामले में गिरोह के कम से कम आठ सदस्यों को गिरफ्तार किया है। इनमें उत्तरप्रदेश के दो, हरियाणा के दो, बिहार का एक और तीन आरोपी ग्वालियर (मध्यप्रदेश) के बताए गए हैं। संविदा नर्सिंग स्टाफ की परीक्षा एक दिन पहले राज्य के विभिन्न हिस्सों में सुबह और दोपहर में दो पालियों में दो दो घंटे के लिए आयोजित की गयी थी। इसी बीच संबंधित पेपर पहले ही कुछ लोगों के पास पहुंचने (पेपर लीक) की खबर आ गयी और आनन फानन में इस परीक्षा को संबंधित एजेंसी ने निरस्त कर दिया।
पुलिस सूत्रों के अनुसार दरअसल पुलिस को सूचना मिली थी कि इस परीक्षा का पेपर लीक कर सॉल्व कराने वाला अन्तर्राज्यीय गिरोह ग्वालियर में सक्रिय है। सूचना की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक ग्वालियर ने विशेष दल बनाकर मामले में कार्रवाई करायी गयी। पुलिस की अपराध शाखा टीम ने डबरा थाना क्षेत्र के टेकनपुर स्थित एक होटल में छापा मारा, तो वहां पेपर लीक कराने वाले गिरोह के सदस्य परीक्षा का पेपर लिए हुए मिले। पुलिस ने एनएचएम के तहत संविदा आधारित नर्सिंग स्टॉफ की परीक्षा के पेपर लीक कराने वाले गिरोह के 8 सदस्यों को हिरासत में ले लिया है। वहीं उनका एक साथी मौके से भाग निकला, जो मास्टरमाइंड (गिरोह का सरगना) है और मूल रूप से उत्तरप्रदेश का निवासी है। इसके बारे में और जानकारियां जुटायी जा रही हैं।
गिरोह के सदस्यों से प्रारंभिक पूछताछ में पता चला है कि उनके तार प्रदेश के बड़े शहरों भोपाल, इन्दौर, जबलपुर, सागर, रतलाम, रीवा आदि से भी जुडे हुए हैं। गिरोह के सदस्यों से और अधिक पूछताछ करने पर पता चला है कि दिल्ली की एक निजी कंपनी की मदद से यह पेपर बाहर आया है। गिरोह के काम करने के तरीके के बारे में बताया गया है कि मुख्य सरगना द्वारा अपने गिरोह के सदस्यों की मदद से परीक्षा में शामिल हो रहे परीक्षार्थियों के परिजनों से संपर्क करता और पेपर तथा उसके उत्तर मुहैया कराने के एवज में प्रति परीक्षार्थी दो से तीन लाख रुपए में डील होती थी।
पुलिस ने छापे के दौरान मौके से एक लेपटॉप, दो प्रिंटर मशीन, पेपर, सॉल्व पेपर, परीक्षार्थियों की मार्कशीट तथा अन्य सामग्री जप्त की है। पुलिस इस मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए गहन जांच में जुट गयी है।

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