नई दिल्ली। दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी द्वारा दिनांक 15 फरवरी 2023 को दोपहर 2:00 बजे केंद्रीय पुस्तकालय के गीतांजलि सभागार में महर्षि दयानंद सरस्वती की 200 वीं जयंती के उपलक्ष्य में महर्षि दयानंद सरस्वती का जीवन दर्शन एवं आर्य समाज की स्थापना विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम दिल्ली लाइब्रेरी बोर्ड के अध्यक्ष सुभाष चंद्र कानखेड़िया की अध्यक्षता एवं दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी के महानिदेशक डॉ. आर. के. शर्मा के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। कार्यक्रम का दिल्ली लाइब्रेरी बोर्ड के उपाध्यक्ष परीक्षित डागर की विशेष उपस्थिति रही तथा मुख्य वक्ता के रूप अधिवक्ता व डोपिंग रोधी अनुशासनात्मक बोर्ड की सदस्य चारु प्रज्ञा एवं वक्ता के रूप में दिल्ली लाइब्रेरी बोर्ड की सदस्य, विभा लाल चावला उपस्थित रहीं ।

मंच संचालन करते हुए दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी की सहायक पुस्तकालय एवं सूचना अधिकारी, श्रीमती उर्मिला रौतेला द्वारा सभी गणमान्य अतिथियों को मंच पर आमंत्रित किया गया तथा विशिष्ट अतिथियों द्वारा दीप प्रज्ज्वलन तथा महर्षि दयानंद सरस्वती के चित्र पर पुष्प अर्पण के साथ कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ उपाध्यक्ष, दिल्ली लाइब्रेरी बोर्ड श्री परीक्षित डागर, ने मुख्य वक्ता, चारु प्रज्ञा तथा सभी उपस्थित अतिथियों का स्वागत एवं अभिनंदन करते हुए स्वामी दयानंद सरस्वती की 200जयंती की पृष्ठभूमि में प्रकाश डाला और प्रधानमंत्री जी को इसकी अगुवाई करने के लिए धन्यवाद ज्ञापित किया तथा उन्होंने बताया कि समाज की कुरीतियों को मिटाने में स्वामी दयानंद सरस्वती का अहम योगदान रहा है इसलिए 21वीं शताब्दी में स्वामी दयानंद सरस्वती जी के विचारों को आगे लेकर चलना बहुत महत्वपूर्ण है ।

मुख्य वक्ता चारू प्रज्ञा ने कहा कि स्वामी दयानंद सरस्वती जी जैसे महान व्यक्तित्व को एक वक्तव्य में समेटना बहुत मुश्किल है । ओम के महत्व और इसकी शक्ति को समझाते हुए अपना वक्तव्य प्रारंभ किया । तत्पश्चात उन्होंने गायत्री मंत्र का जाप कर उसका अर्थ सभी से साझा किया । सामाजिक कुरीतियों पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि इन्हीं कुरीतियों से मुक्ति के लिए आर्य समाज का जन्म हुआ । स्वामी दयानंद सरस्वती वह पहले व्यक्ति थे जिन्होंने स्व तथा स्वराज्य की बात की । आर्य समाज ने राष्ट्र को देशभक्ति का बोध कराया और सामाजिक उत्थान का कार्य किया । स्वामी दयानंद सरस्वती एक महान समाज सुधारक थे और उन्होंने वेदों का गहन अध्ययन करके उनकी विशद व्याख्या समाज के सामने रखी । स्वामी दयानंद सरस्वती जी द्वारा स्थापित आर्य समाज का मानना है कि जब हम भगवान के विभिन्न स्वरूपों पर जोर देने लगते हैं तो उसका अस्तित्व कम हो जाता है । हमारा धार्मिक जीवन किसी को दिखाने के लिए नहीं होता । हम ईश्वर का किसी भी रूप में पूजन करें, ईश्वर एक है ! चारु प्रज्ञा ने कहा कि वेदों की बाद में व्याख्या करते हुए उनके शब्दार्थ में अंतर हो जाने से कुछ विसंगतियां आ सकती हैं वास्तव में आर्यसमाज सनातन से ही उत्पन्न हुआ है उन्होंने समाज में स्वामी दयानंद सरस्वती जी की कर्तव्य परायणता और उनका सामाज के उत्थान में योगदान को अत्यंत प्रेरणादायी बताया ।
वक्ता विभा लाल चावला, सदस्य दिल्ली लाइब्रेरी बोर्ड ने बताया कि आर्य समाज उनके हृदय के बहुत करीब है। आर्य समाज को आत्मसात करते हुए उन्होंने कहा कि हमें मूर्ति पूजा, महिला सशक्तिकरण, सामाजिक कुरीतियों को मिटाने में स्वामी दयानंद सरस्वती जी के योगदान एवं आर्य समाज के प्रति कृतज्ञ रहना चाहिए और इसका अनुसरण करना चाहिए अध्यक्ष, दिल्ली लाइब्रेरी बोर्ड , सुभाष चंद्र कानखेड़िया ने ? से अपने उद्बोधन का प्रारंभ किया । उन्होंने बताया कि उनका शिक्षण डी.ए.वी. विद्यालय से पूर्ण करने के कारण आर्य समाज के मूल्य और विचार उनमें स्वत: ही समाए हुए हैं । आर्य समाज किसी एक व्यक्ति नहीं बल्कि समूचे विश्व के कल्याण की बात करता है । तुर्की में भूकंप पीड़ितों को भारत द्वारा दी जा रही सहायता का उदाहरण देते हुए उन्होंने बताया कि हम केवल किताबों में नहीं बल्कि अपने व्यवहार में भी वसुधैव कुटुंबकम् का आचरण करते हैं । स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा लिखित पुस्तक सत्यार्थ प्रकाश पर चर्चा करते हुए उन्होंने सभी से यह पुस्तक पढ़ने का आवाहन किया । उन्होंने बताया कि वंदे मातरम और स्वराज शब्द भी स्वामी दयानंद सरस्वती की देन है । उन्होंने कहा कि स्वामी जी पर आयोजित यह कार्यक्रम एक शुरुवाद है, आगे भी वर्ष भर इस प्रकार के कार्यक्रम आयोजित किये जाते रहेंगे क्योकि स्वामी जी द्वारा स्थापित मूल्यों से सभी को परिचित करवाने की आवश्यकता है । उन्होंने कहा कि अपने आप का जितना शुद्धिकरण हम स्वयं कर सकते हैं उतना कोई पंडित नहीं कर सकता इसलिए हमें स्वयं का आंकलन करते रहना होगा । उन्होंने कहा कि बाल विवाह, जाति के आधार पर भेदभाव , छुआछूत आदि कुरीतियों को समाज से दूर करने के कारण आर्य समाज ने बहुत महत्ती भूमिका निभाई है । उन्होंने सभी से स्वामी दयानंद सरस्वती एवं स्वामी विवेकानंद के दिखाए रास्ते पर चलने का आग्रह किया ।
महानिदेशक, दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी, डॉ. रविन्द्र कुमार शर्मा ने अपने विचार साझा करते हुए बताया कि सभी धर्म सनातन से ही निकले हैं । आर्य समाज सनातन का सरलीकरण है । तत्कालीन सामाजिक परिस्थिति को देखते हुए सामाजिक कुरीतियों को मिटाने के उद्देश्य से आर्य समाज का जन्म हुआ । इसी प्रकार महापुरुषों के विचारों से सभी को रूबरू करवाने हेतु अन्य कार्यक्रमों का आयोजन करते रहने का आश्वासन देते हुए उन्होंने कार्यक्रम में सम्मिलित होने के लिए सभी का धन्यवाद किया । तत्पश्चात राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ ।
