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शास्त्री जी की फोटो लगाते कांग्रेस को शर्म नहीं आती

भोपाल : शिवराज सिंह चौहान ने आज कांग्रेस के राष्ट्रीय अधिवेशन के विज्ञापनों के माध्यम से कांग्रेस पर जबर्दस्त हमला बोलते हुए कहा कि अपमानित करना कांग्रेस की संस्कृति है और अपने विज्ञापन में पूर्व प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री की तस्वीर लगाते क्या कांग्रेस को शर्म नहीं आती।
चौहान ने संवाददाताओं से चर्चा के दौरान कहा कि उन्हें आश्चर्य है कि कांग्रेस ने राष्ट्रीय अधिवेशन के जो विज्ञापन दिए, उनमें महात्मा गांधी का फोटो लगाया। महात्मा गांधी ने कहा था कि कांग्रेस को आजादी के बाद भंग कर देना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने डॉक्टर भीमराव अंबेडकर का फोटो लगाया, जिन्हें चुनाव में हराने का काम कांग्रेस ने किया।नेताजी सुभाष चंद्र बोस की फोटो लगाई, जिन्होंने कांग्रेस छोड़ दी थी और देश की आजादी के लिए प्रभावशाली रास्ता चुना था। लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की फोटो लगाई लगाई, जिन्हें कांग्रेस ने हमेशा अपमानित किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कांग्रेस ने अपने राष्ट्रीय अधिवेशन में सिर्फ राजनीतिक लाभ के लिए जो फोटो लगाए हैं, उसका उन्हें कोई नैतिक अधिकार नहीं है। पूर्व प्रधानमंत्री पीवी नरसिंह राव की फोटो लगा ली, जबकि कांग्रेस ने उनका अंतिम संस्कार तक ढंग से नहीं होने दिया था।
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अपमानित करना कांग्रेस की संस्कृति है। प्रधानमंत्री लालबहादुर शास्त्री को इंदिरा गांधी ने अपमानित करते हुए उनके आवास तीन मूर्ति भवन से बाहर कर दिया था। अपमान भरे शब्द थे ‘यह आपके (शास्त्री जी) के हिसाब से ज्यादा बड़ा है।’ आज शास्त्री जी की फोटो लगाते उन्हें (कांग्रेस को) शर्म नहीं आती।
चौहान ने कहा कि राहुल गांधी, जिनकी ‘बुद्धि, विवेक और समझ’ से पूरा देश परिचित है, उन्होंने तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह द्वारा लाए गए अध्यादेश की प्रतियां फाड़ दी थीं। अपनी पार्टी की सरकार और देश के प्रधानमंत्री का अपमान कांग्रेस में नया नहीं। सीताराम केसरी का अपमान देश ने देखा है।
उन्होंने कहा कि अपमानित करने के लिए कुख्यात कांग्रेस का कारनामा देखिए, देश के नवनिर्माण को समर्पित विभूतियों को दरकिनार कर जवाहर लाल नेहरू और इंदिरा गांधी ने स्वयं भारत रत्न ले लिया। जिन विभूतियों का अपमान किया, राजनीतिक लाभ के लिए उनके चित्र चलाना कांग्रेस के नैतिक पतन को दर्शाता है।
कांग्रेस के छत्तीसगढ़ के रायपुर में आयोजित राष्ट्रीय अधिवेशन के दौरान समाचारपत्रों में इसके विज्ञापन प्रकाशित हुए थे, जिनमें इन सभी विभूतियों के चित्र प्रकाशित थे। श्री चौहान का ये बयान उसी संदर्भ में आया है।

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