सरकार से जवाब-तलब
नैनीताल : उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने नैनीताल जनपद में खनन सामग्री की ओवर लोडिंग पर अगली सुनवाई तक प्रतिबंध जारी कर दिया है। अदालत ने इसी के साथ सरकार के 30 जनवरी, 2023 के शासनादेश पर भी रोक लगा दी है। अदालत ने क्षेत्रीय परिवहन अधिकारी (आरटीओ) को ऐसे वाहनों के खिलाफ सख्त कार्यवाही करने के निर्देश दिये हैं। साथ ही सचिव खनन, जिला अधिकारी नैनीताल व आरटीओ को नाोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी व न्यायमूर्ति आलोक कुमार वर्मा की युगलपीठ ने लालकुआं निवासी गगन पाराशर की ओर से दायर जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद सोमवार को ये निर्देश जारी किये। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि नैनताल जनपद में जिला खनन समिति की ओर से खनन सामग्री परिवहन करने के लिये वाहनों के लिये अधिकतम 108 कुंतल की सीमा तय कर रखी है। सभी वाहनों के लिये इससे अधिक खनन सामग्री परिहवन करना प्रतिबंधित था।
इसका उल्लंघन करने वाले वाहनों को अगले दिन खनन सामग्री परिवहन करने पर प्रतिबंधित कर दिया जाता था लेकिन सरकार ने 30 जनवरी, 2023 को एक आदेश जारी कर ऊपरी सीमा को हटा दिया है। रायल्टी वसूलने की शर्त पर वाहनों को असीमित सामग्री ले जाने की छूट प्रदान कर दी गयी है। ऐसे वाहनों को अगले दिन भी खनन सामग्री ले जाने की अनुमति है।
याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि इस आदेश के चलते वाहन जरूरत से अधिक सामग्री परिवहन कर रहे हैं। ऐसे में सड़कों पर अधिक भार पड़ रहा है और सड़कों को नुकसान हो रहा है। साथ ही दुर्घना का खतरा भी बढ़ गया है जिससे जान मान के नुकसान की अंदेशा है। याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि केन्द्र सरकार व उच्चतम न्यायालय की ओर से भी 2005 में ओवर लोडिंग पर प्रतिबंध जारी किया गया है।
अदालत ने इसे गंभीरता से लेते हुए सरकार से 19 जुलाई तक रोक लगा दी। साथ ही आरटीओ को यातायात नियमों का सख्ती से पालन करने के निर्देश दिये हैं।
