नई दिल्ली : विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा है कि भारत जलवायु परिवर्तन के शमन-दमन के उपाय करने के मामले में आज अग्रणी देशों में है और स्वस्थ विकास के लक्ष्यों तक देश समय से बहुत पहुंच जाएगा। विदेश मंत्री ने यहां मंगलवार को भारत-यूरोप व्यवसाय एवं स्वस्थ विकास विषय पर उद्योगमंडल सीआईआई द्वारा आयोजित सम्मेलन में कहा कि इस क्षेत्र में भारत और यूरोप के बीच ‘क्षमता निर्माण ’ के क्षेत्र में सहयोग बहुत जरूरी है और यह सबसे महत्वपूर्ण भी है।
उन्होंने कहा कि भारत में हरित विकास की दिशा में प्रगति के प्रयासों में बैटरी वाहन (ईवी) एक बहुत महत्वपूर्ण क्षेत्र है । स्वच्छ ऊर्जा और प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, ऐसे कुछ महत्वपूर्ण क्षेत्रों में हैं जिनमें भारत और यूरोप सहयोग कर सकते हैं। कार्यक्रम को डेनमार्क के विदेश मंत्री एलएल रासमूसेन ने भी संबोधित किया और भारत को डेनमार्क का महत्वपूर्ण भागीदार बताया।
जयशंकर ने कहा कि भारत के लिए यूरोपीय संघ (ईयू) व्यापार में सबसे बड़ा भागीदार है। 2021-22 में दोनों पक्षों के बीच कुल 115 अरब डालर का व्यापार हुआ था जो अब तक का रिकार्ड है। उन्होंने कहा कि प्रस्तावित भारत-ईयू मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) बाजी मारने वाली पहल साबित हो सकता है। उन्होंने इसे एक महत्वपूर्ण लक्ष्य बताया ।
विदेश मंत्री ने यह भी कहा कि एफटीए के बारे में भारत के नए दृष्टिकोण में प्रशुल्कीय और गैर प्रशुल्कीय बाधांओं, मानकों और अन्य मुद्दों को भी शामिक किया गया है। उन्होंने कहा कि भारत में मध्यवर्ग की आबादी बढ़ रही है और इससे यह दुनिया के लिए अधिकाधिक आकर्षक बाजार बन रहा है।
उन्होंने कहा कि मोदी सरकार के पिछले नौ वर्ष के कार्यकाल में कई बुनियादी नितिगत सुधार किए गए हैं जिससे देश को विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में बढ़ेगा तथा यूरोप के साथ भारत की प्रगति को और बढ़ावा मिलेगा। उन्होंने कहा कि भारत-यूरोप संबंधों की प्रगति को आगे बढ़ाने में निजी क्षेत्र को महत्वपूर्ण भूमिकों निभानी है।
जलवायु परिवर्तन के शमद-दमन में भारत अग्रणी
