भोपाल : कमलनाथ ने आज विधानसभा में वर्ष 23-24 के लिए पेश किये गये बजट पर प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए कहा कि बजट को देखकर ऐसा प्रतीत हुआ कि यह भाजपाई सत्ता की मध्यप्रदेश से विदाई का बजट है। कमलनाथ ने कहा कि इस बजट में सबसे बड़ा आघात मध्यप्रदेश की बेक बोन कही जाने वाली ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर पड़ा है। किसानाें और ग्रामीण क्षेत्र की उपेक्षा जिस प्रकार इस बजट में की गई है वह बेहद निंदनीय है।
इस बजट में न किसान और ग्रामीण क्षेत्र की प्रगति और समृद्धि का कोई रोडमेप है, न औद्योगिक विकास की कोई इबारत लिखी गई, न युवाओं के रोजगार के अवसर सृजित होते हुए दिखाई दे रहे हैं, न अधोसंरचना विकास की विस्तृत सोच दिखाई देती है, न समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े हुए दलित, आदिवासी और पिछड़े भाईयों के भविष्य का ख्याल रखा गया है।
उन्होंने कहा कि हमारी सरकार ने जो दो लाख रूपये तक के किसानों के कर्जमाफी की योजना प्रारंभ की थी, उसे भी बंद कर प्रदेश के किसानों के साथ बहुत बड़ा कुठाराघात किया है और फसल ऋणमाफी योजना के लिए शर्मनाक तरीके से सिर्फ 3 हजार रूपये का प्रावधान किया गया। उन्होंने कहा कि कृषि एवं उसकी सहायक गतिविधियां में सरकार ने किसान कल्याण तथा कृषि विकास, उद्यानिकी, पशुपालन, ऊर्जा, लोक निर्माण, जल संसाधन, ग्रामीण विकास जैसे 14 विभागाें को सम्मिलित कर उसमें 53964.80 करोड़ रूपये वर्ष 2023-24 में प्रस्तावित किये हैं। जबकि 2022-23 के पुनरीक्षित अनुमान के अनुसार यह प्रावधान 60854.1 करोड़ रूपये था। यानि पुनरीक्षित अनुमान के आधार पर लगभग 6000 करोड़ रूपये कृषि एवं किसान कल्याण और उसकी सहायक गतिविधियों में कम करके किसानाें और ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर कुठाराघात किया है।
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना में 2022-23 में 2930 करोड़ रूपये प्रावधानित किये गये थे, जिसे बेहद कम करते हुये 1826 करोड़ रूपये कर दिया गया है। इसी प्रकार राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना में 2022-23 में 2205 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया था, जिसे घटाकर 1765 करोड़ रूपये किया गया। इसी प्रकार मुख्यमंत्री ग्राम सड़क योजना में 2022-23 में 400 करोड़ रूपये था जिसे घटाकर 100 करोड़ रूपये किया गया। प्रधानमंत्री आवास योजना में भी पिछले वर्ष की तुलना मेंं 800 करोड़ रूपये कम कर दिये गये हैं। महिला किसान सशक्तिकरण परियोजना में शर्मनाक तरीके से मात्र 6000 रूपये का प्रावधान किया गया है।
उन्होंने कहा है कि बजट में मात्र 1000 करोड़ रूपये का प्रावधान किया गया है जो कि पिछले वर्ष की तुलना में भी 500 करोड़ रूपये कम है। मुख्यमंत्री किसान कल्याण योजना में भी लगभग 250 करोड़ रूपये की कमी की गई है। कृषि क्षेत्र में अधोसंरचना विकास के बजट में भी पुनरीक्षित अनुमान से 40 प्रतिशत की कटौती की गई है। भाजपा सरकार ने न सिर्फ किसानों और प्रदेश के ग्रामीण विकास के साथ छलावा किया है, अपितु भगवान प्रभु श्रीराम के प्रति आस्था रखने वाले प्रदेश के करोड़ों लोगां को ठेस पहुंचायी है।
मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्री राम ने अपने वनवास का अधिकांश समय मप्र में व्यतीत कर अपनी चरणधूली से प्रदेश धन्य हुआ। हमारी सरकार के समय हमने विस्तृत योजना तैयार की थी मगर वर्तमान भाजपा सरकार ने समूचे प्रदेश की धार्मिक भावनाओं को आहत करते हुए राम पथ गमन अंचल विकास योजना के मद में शून्य बजट का प्रावधान कर अपनी धार्मिक मानसिक शून्यता का प्रदर्शित किया है। इसी प्रकार अनुसूचित जाति वर्ग के छात्रावास के बजट में कमी करना, अनसूचित जाति-जनजाति की बस्तियों के विकास योजना के मद को पिछले वर्ष की तुलना में 50 प्रतिशत की कटौती कर देना। इसी प्रकार अनुसूचित जाति-जनजाति के विद्यार्थियों के आवास सहायता के बजट को पुनरीक्षित अनुमान (2022-23) 177 करोड़ से 103 करोड़ कर देना दर्शाता है कि प्रदेश सरकार की प्राथमिकता में अनुसूचित जाति-जनजाति वर्ग के लोग नहीं हैं।
