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अनुसूचित जाति के आरक्षण में बंटवारा स्वीकार नहीं

नई दिल्ली : विश्व हिन्दू परिषद (विहिप) ने आज कहा कि वह धर्मान्तरण करके ईसाई या मुसलमान बनने वालों को आरक्षण दिये जाने को कतई स्वीकार नहीं करेगी। विहिप के अंतरराष्ट्रीय कार्याध्यक्ष आलोक कुमार ने यहां एक संवाददाता सम्मेलन में कहा कि संविधान में आरक्षण की व्यवस्था जैसे की गयी है, वैसे ही चलते रहनी चाहिए। जिन जातियों को अछूत मान कर उनके साथ भेदभाव किया गया, आरक्षण की व्यवस्था उनके प्रति समाज का प्रायश्चित है। आरक्षण केवल उन्हीं जातियों को लिए है जिन्हें 1931 में अस्पृश्य मानकर अनुसूचित किया गया है।
कुमार ने कहा कि देश में आरक्षण की अवधारणा समाज में निचली अनुसूचित जातियों में अस्पृश्यता की कुप्रथा के निवारण के लिए स्वीकार की गयी थी और धर्मान्तरण करने वाली जातियों को आरक्षण देने से यह उद्देश्य विफल हो जाएगा। इसलिए आरक्षण में कोई परिवर्तन की गुंजाइश या जरूरत नहीं है।
ग्रेटर नाेएडा के गौतम बुद्ध विश्वविद्यालय में दो दिन तक आरक्षण एवं धर्मान्तरण के विषय पर विचार मंथन की जानकारी देते हुए श्री कुमार ने कहा कि बैठक में स्वीकार किया गया कि ईसाई एवं मुसलमानों के 40.7 प्रतिशत से अधिक लोग अन्य पिछड़े वर्ग (ओबीसी) के अंतर्गत आ जाते हैं। उन्हें अल्पसंख्यकों को मिलने वाले लाभ पहले ही मिल रहे हैं। वे केन्द्र सरकार की विभिन्न योजनाओं के लाभार्थी भी हैं। ऐसे में उन्हें अनुसूचित जाति के लिए मिलने वाले आरक्षण में शामिल करने की कोई जरूरत नहीं है। अनुसूचित जातियाें को मिलने वाले लाभ को कम करना कतई स्वीकार नहीं है।
बैठक में ढाई सौ से अधिक विद्धानों ने भाग लिया जिनमें छह पूर्व न्यायाधीश, विश्वविद्यालयों के कुलपति, पूर्व कुलपति, प्राध्यापक, वकील, पत्रकार, शोधार्थी एवं विद्यार्थी शामिल थे।
कुमार ने कहा कि सरकार ने धर्मान्तरण के बाद आरक्षण देने के मुद्दे का गहनता एवं विस्तार से अध्ययन करने के लिए उच्चतम न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश बालाकृष्णन की अध्यक्षता में एक आयोग बनाया है। विहिप इस आयोग को एक ज्ञापन देगी और अपेक्षा करेगी कि आरक्षण की व्यवस्था में बंटवारा नहीं किया जाये और आरक्षण का लाभ असली हकदारों को ही मिले।
आरक्षण देने की व्यवस्था की सीमा के बारे में एक सवाल पर विहिप कार्याध्यक्ष ने कहा कि हाल ही में एक समाचार आया था कि एक दूल्हे के घोड़ी पर सवार होने पर उसे घोड़ी से उतार कर पीटा गया। जब तक ऐसी घटनाएं एवं मानसिकता रहेगी, तब तक अनुसूचित जातियों के लिए आरक्षण रहना चाहिए।

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