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80 हजार फोर्ज्ड रेल पहियों के निर्माण के लिए निविदाएं खुलीं

नई दिल्ली : भारत ने रेलवे की वंदे भारत एवं अन्य आधुनिक ट्रेनों की जरूरत के लिए फोर्ज्ड पहियों के देश में ही निर्माण करने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाया है। सालाना करीब 80 हजार फोर्ज्ड पहियों के निर्माण के लिए वित्तीय निविदाएं खुल गयीं हैं और कोलकाता की मेसर्स रामकृष्ण फोर्जिंग्स ने सबसे कम बोली लगायी है।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार अगले बीस वर्ष तक हर साल 80 हजार पहियों के निर्माण के लिए मंगलवार को वित्तीय निविदाएं खोली गयीं। 24 जनवरी को निविदाएं आमंत्रित की गयीं थीं जिसमें तीन कंपनियों -मेसर्स रामकृष्ण फोर्जिंग्स, कोलकाता, मेसर्स भारत फोर्ज, पुणे और भारतीय इस्पात प्राधिकरण लिमिटेड (सेल) ने भाग लिया था।
सूत्रों ने बताया कि रामकृष्ण फोर्जिंग्स ने सबसे कम मूल्य यानी एक लाख 88 हजार एक सौ रुपए प्रति टन की दर से फोर्ज्ड पहियों के निर्माण की पेशकश की जबकि भारत फोर्ज पुणे ने दो लाख 75 हजार रुपए प्रति टन और सेल ने दो लाख 89 हजार पांच सौ रुपए प्रति टन की दर से पहियों के निर्माण का प्रस्ताव किया है।
सूत्रों के अनुसार सफल निविदाकर्ता को ठेका आवंटन के 36 माह के भीतर विनिर्माण इकाई की स्थापना करनी होगी। निविदा की शर्तों के अनुसार ठेका प्राप्त करने वाली कंपनी को विभिन्न प्रकार के 80 हजार फोर्ज्ड पहिए बनाने होंगे। उत्पादन शुरू होने के बीस वर्षों में से तीन साल तक पहिये की कीमत दो प्रतिशत कम होती जाएगी और चौथे साल से 94 प्रतिशत मूल्य पर ही बाकी के 17 साल तक आपूर्ति की जाएगी।
वर्तमान में सेल रेलवे को एक लाख 87 हजार रुपए प्रति टन की कीमत पर आपूर्ति कर रही है। सेल की मौजूदा क्षमता 40 हजार पहिये प्रति वर्ष उत्पादन की है जबकि आरआईएनएल 80 हजार पहिये बनाती है। इस प्रकार से भारत में एक लाख 20 हजार पहिये सालाना बनते हैं।
भारत अभी तक फोर्ज्ड पहियों का ब्रिटेन, चेक गणराज्य, ब्राज़ील, रोमानिया, जापान, चीन, यूक्रेन एवं रूस से करता रहा है। वर्ष 2022-23 में भारत ने चीन एवं रूस से 520 करोड़ रुपए मूल्य के 80 हजार पहिये आयात किये हैं। एक अनुमान के अनुसार 2026 तक भारत में दो लाख फोर्ज्ड पहियाें की जरूरत होगी। चूंकि एक लाख 20 हजार पहिये बन रहे हैं और 80 हजार और बनने लगेंगे तो भारत को रेल पहिये आयात करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी और इस मामले में देश आत्मनिर्भर हो जाएगा।

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