मुंबई : महाराष्ट्र में पुरानी पेंशन योजना (ओपीए) लागू करने की मांग को लेकर सरकारी तथा अर्ध सरकारी कर्मचारियों की हड़ताल का गुरुवार को तीसरा दिन है और इस हड़ताल में स्वास्थ्यकर्मियों तथा नर्सों के शामिल होने की वजह से अस्पतालों में सर्जरी तथा मरीजों की देखभाल की सेवा बुरी तरह प्रभावित हुई है।
डॉक्टरों को छोड़कर अस्पतालों में कोई अन्य कर्मचारी नहीं है, क्योंकि स्वास्थ्य कार्यकर्ता, नर्स, सफाई कर्मचारी सभी हड़ताल में शामिल हो गए हैं, जिससे अस्पताल का कामकाज चरमरा गया है।
बीड जिले के सिविल अस्पताल में नियमित दैनिक जांच और मामूली सर्जरी भी बंद कर दी गई है, हालांकि आपातकालीन सेवाए जारी हैं। अहमदनगर के जिला अस्पताल में हालांकि स्थिति कुछ बेहतर है। फिलहाल जिला अस्पताल में संविदा कर्मियों को सेवा में लगाया गया है और यहां मरीजों को सुविधाएं मिल रही हैं। कर्मचारियों ने हालांकि सरकार द्वारा उनकी मांगों पर सकारात्मक रूप से विचार नहीं करने पर आंदोलन तेज करने की चेतावनी दी है।
नागपुर जिले के हिंगाना तालुका के ग्रामीण (उप जिला) अस्पताल में इलाज के लिए आने वाले सैकड़ों मरीजों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है क्योंकि इस अस्पताल के 22 में से 16 कर्मचारी हड़ताल में शामिल हो गए हैं।
कुछ मरीजों ने कहा कि उन्हें उप जिला अस्पताल के अधिकारियों द्वारा प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा गया था। एक अस्पताल से दूसरे अस्पताल के चक्कर लगाने से मरीज और उनके परिजन काफी परेशान नजर आ रहे थे। कई लोगों को दवा के लिए इधर-उधर भटकना पड़ा। हिंगाना ग्रामीण अस्पताल में मरीजों ने शिकायत की कि जब उन्हें कुत्ते के काटने जैसी समस्याओं के लिए तत्काल उपचार की आवश्यकता होती है, तो उन्हें देखने वाला कोई नहीं होता है।
सूत्रों ने बताया कि वर्धा जिले में हिंगनघाट उप-जिला अस्पताल के 60 कर्मचारी हड़ताल पर हैं, जिससे सेवाएं चरमरा गई हैं। कर्मचारियों की कमी के कारण हड्डी रोग एवं स्त्री रोग विभाग में सर्जरी ठप पड़ी है। एक अधिकारी ने कहा कि पिछले दो दिनों में चार सर्जरी रद्द करनी पड़ी हैं। स्त्री रोग खंड में सिजेरियन सिस्टम ध्वस्त हो गया है। सिजेरियन सेक्शन के लिए आने वालों को दूसरे अस्पतालों में भेजा जा रहा है।
स्वास्थ्यकर्मियों की हड़ताल से मरीज परेशान
