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राज्यसभा में गतिरोध दूर करने को जुटे धनखड़

नई दिल्ली : राज्यसभा के सभापति जगदीप धनखड़ ने सत्ता पक्ष और विपक्षी दलों के बीच जारी गतिरोध को खत्म करने के प्रयास करते हुए मंगलवार को दो बार विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं की बैठक बुलाई और कहा कि सदन की कार्यवाही को सुचारू रूप से चलाना सबका प्रमुख कर्तव्य है।
उप राष्ट्रपति सचिवालय ने यहां जारी एक विज्ञप्ति में कहा कि सभापति ने 23 मार्च को सुबह 10.00 बजे अगली बैठक निर्धारित की है और सभी पार्टियों के सदन के नेताओं से इसमें शामिल होने की अपील की है।
धनखड़ ने सुबह 11:30 बजे और भोजन अवकाश के बाद 14:30 सदन में विभिन्न दलों के नेताओं की बैठक बुलाई। बैठक का उद्देश्य सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच सदन में जारी गतिरोध को दूर करना था।
उन्होंने कहा “ सदन का सुचारू संचालन सभी दलों का कर्तव्य है। यही लोकतंत्र का सार है और लोगों की हमसे यही अपेक्षा है।” डेढ़ घंटे तक चली बैठक के दौरान उन्होंने कहा कि सदन सहयोगात्मक तरीके से बहस और चर्चा के लिए है। यह टकराव और गतिरोध के लिए नहीं है।
पहली बैठक सुबह 11.30 बजे हुई जिसमें भारतीय जनता पार्टी, वाईएसआर कांग्रेस पार्टी, बीजू जनता दल और तेलुगू देशम पार्टी के नेता मौजूद थे। हालांकि, अन्य पार्टियों के नेता इसमें शामिल नहीं हुए। कांग्रेस पार्टी के मुख्य सचेतक और द्रविड़ मुनेत्र कड़गम के सदन में नेताओं ने भी बैठक से पहले सभापति से अलग से मुलाकात की और सभापति द्वारा बुलाई गई बैठक में भाग लेने में असमर्थता व्यक्त की। सभापति ने दोनों नेताओं से कहा कि इससे लोकतंत्र को मजबूत करने में मदद नहीं मिलेगी और उनकी भावनाओं को अन्य दलों के नेताओं तक पहुंचा दिया जाएगा।
पहली बैठक में कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, द्रमुक, आम आदमी पार्टी, राष्ट्रीय जनता दल, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी , जनता दल- यूनाइटेड, अन्नाद्रमुक, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी, समाजवादी पार्टी, शिवसेना , भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी, भारत राष्ट्र समिति और अन्य पार्टियों के नेता अनुपस्थित रहे।
इसके बाद, राज्यसभा के सभापति ने पहली बैठक में अनुपस्थित पार्टियों के सदन के नेताओं से अपने फैसले पर फिर से विचार करने और दोपहर 2:30 बजे आयोजित दूसरी बैठक में भाग लेने की अपील की।
दूसरी बैठक में राज्यसभा के उपसभापति डॉ. हरिवंश, श्री शरद पवार (राकांपा), डॉ. केशव राव (बीआरएस), श्री तिरुचि शिवा (द्रमुक), डॉ. शांतनु सेन (तृणमूल कांग्रेस ), श्री एम थंबीदुरई (द्रमुक), श्री सस्मित पात्रा (बीजद) , श्री जीके वासन (तमिल मनीला कांग्रेस), श्री बीरेंद्र प्रसाद बैश्य (एजीपी), केंद्रीय मंत्री और सदन के नेता पीयूष गोयल, संसदीय मामलों के मंत्री प्रल्हाद जोशी, संसदीय कार्य और संस्कृति राज्य मंत्री, अर्जुन राम मेघवाल, विदेश और संसदीय मामलों के राज्य मंत्री वी मुरलीधरन और भाजपा (राज्यसभा) के मुख्य सचेतक लक्ष्मीकांत बाजपेयी शामिल हुए।
राज्यसभा में आज भी लगातार सातवें दिन कोई कामकाज नहीं हो सका और सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच लगातार गतिरोध बना रहा। विपक्षी दल हिंडेनबर्ग रिपोर्ट पर संयुक्त जांच समिति गठित करने की मांग कर रहा है जबकि सत्ता पक्ष विदेशों में भारतीय लोकतंत्र का अपमान करने वाले नेताओं से माफी मंगवाने की मांग कर रहा है।

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