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शहीद दिवस के उपलक्ष्य में संगोष्ठी का आयोजन

“अमर शहीद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की शहादत युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत” विषय पर हुई संगोष्ठी

दिल्ली/ चाँदनी चौक स्थित दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी द्वारा शहीद दिवस के उपलक्ष्य में “अमर शहीद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की शहादत युवाओं के लिए प्रेरणा स्रोत” विषय पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया । दिल्ली लाइब्रेरी बोर्ड के अध्यक्ष श्री सुभाष चन्द्र कानखेड़िया की अध्यक्षता एवं महानिदेशक डॉ. आर. के. शर्मा के मार्गदर्शन में आयोजित इस संगोष्ठी में मुख्य वक्ता के रूप में भारत सरकार के पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. सत्यनारायण जटिया एवं वक्ता के रूप में ग्लोबल कॉलेज ऑफ़ लॉ के निदेशक डॉ. भारत एस. सत्यार्थी उपस्थित रहे ।
कार्यक्रम का शुभारंभ अमर शहीद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु के चित्र के समक्ष दीप प्रज्ज्वलन और उनके चित्र पर गणमान्य अतिथियों द्वारा पुष्पांजलि अर्पण से हुआ I दिल्ली पब्लिक लाइब्रेरी की सहायक पुस्तकालय एवं सूचना अधिकारी श्रीमती उर्मिला रौतेला द्वारा मंच संचालन करते हुए तथा कार्यक्रम की रूपरेखा रखते हुए कहा गया कि यह दिन हमें याद दिलाता है, हमारे उन तीन महान राष्ट्रभक्तों का जिन्होंने अपनी जान की तनिक परवाह नहीं करते हुए मातृभूमि की बलिवेदी पर अपनी जान न्योछावर कर दी और सदा-सदा के लिए अमर हो गए I हमारे इन प्रेरणा पुंजों को को आज हम नमन करेंगें इस संगोष्ठी के माध्यम से और इसी माध्यम से उन्हें स्मरण कर हम अपने श्रद्धा सुमन अर्पण करेंगे I
श्री सुभाष चन्द्र कानखेड़िया ने सभागार में उपस्थित सभी विशिष्ट अतिथिगणों एवं श्रोताओं का कार्यक्रम में उपस्थित होने पर स्वागत किया । उन्होंने कहा कि 23 मार्च का दिन देश के लिए बहुत ही महत्वपूर्ण है । अमर शहीदों के विषय में अपने भाव व्यक्त करते हुए उन्होंने बताया कि इतनी छोटी आयु में इतनी समझ और देश प्रेम का ऐसा जज्बा होना अद्भुत है । अपने अंतिम समय में शहीद भगत सिंह द्वारा अपने भाई को लिखे पत्र का पठन कर उन्होंने भगत सिंह के व्यक्तित्व पर प्रकाश डाला । उन्होंने श्रोताओं को बताया कि इन अमर शहीदों को मृत्युदंड के लिए 24 मार्च की सुबह तय की गई थी लेकिन किसी बड़े जनाक्रोश की आशंका से डरी हुई अंग्रेज सरकार ने 23 मार्च की रात्रि को ही इन क्रांतिवीरों की जीवन लीला समाप्त कर दी और रात के अंधेरे में ही सतलुज नदी के किनारे इनका अंतिम संस्कार भी कर दिया गया । जो कि भारतीय इतिहास की अत्यंत हृदय विदारक घटना है , जिसने आजादी के लिए जन-जन में आक्रोश भर दिया था I

डॉ. भारत एस. सत्यार्थी ने कहा कि आज वह दिन है, जब देश की आजादी के लिए साहस के साथ ब्रिटिश सरकार से मुकाबला करने वाले इन वीर सपूतों को फांसी दी गई थी । भगत सिंह ने अपने अति संक्षिप्त जीवन में वैचारिक क्रांति की जो मशाल जलाई, उनके बाद अब किसी के लिए संभव न होगी । उन्होंने कहा कि ‘आदमी को मारा जा सकता है उसके विचार को नहीं, यही वजह है कि आज भी इनके विचारों को सुनकर हमारे रोम-रोम में देश भक्ति की भावना जाग उठती है । सरदार भगत सिंह ने हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन की स्थापना की और अपने साथियों सुखदेव, राजगुरु और चंद्रशेखर आजाद के साथ मिलकर अंग्रेजों से लोहा लिया तथा इन सभी ने देश के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया I

डॉ. सत्यनारायण जटिया ने अनेक काव्यमय प्रस्तुतियों के माध्यम से सभागार में उपस्थित सभी जनों के समक्ष राष्ट्र प्रेम के भाव को गहनता से प्रकट किया । उन्होंने कहा कि शहीद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु जैसे महान क्रांतिकारी ऐसे उदाहरण हैं जिन्हें युवा अपने अंदर समाहित कर सकते हैं । ये ऐसे अमर शहीद हैं जो आजाद भारत के स्वप्नदृष्टा के रूप में हंसते-हसंते सूली पर चढ़ गए । शहीदों की शहादत की यह परंपरा भारत के प्रत्येक युवा वर्ग के लिए प्रेरणा स्रोत, देशभक्ति व राष्ट्र के प्रति उत्कृष्ट बलिदान के रूप में युगों-युगों तक याद की जाएगी। आज यह दिन है जो हमें हमारी स्वतंत्रता को बचाने का संदेश देता है, जब व्यक्ति स्वतंत्रता रूपी भवन की नींव पर अन्दर तक समाहित हो जाते हैं, तभी स्वतंत्रता प्राप्त हो पाती है I
डॉ. आर. के. शर्मा ने सभी गणमान्य अतिथियों, कार्यक्रम में उपस्थित श्रोताओं, पाठकों, मीडिया कर्मियों का कार्यक्रम में सम्मिलित होकर इतनी तल्लीनता से वक्ताओं के विचारों को सुनने हेतु धन्यवाद दिया । संगोष्ठी के विषय पर चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि एक युवक 23 वर्ष की आयु में राष्ट्र की स्वतंत्रता का स्वप्न संजोए अपने प्राणों का बलिदान कर देता है यह बात ही अपने आप में प्रेरणा का स्रोत है । तत्पश्चात राष्ट्रगान के साथ कार्यक्रम का समापन हुआ ।

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