डॉक्टर सुशील शर्मा
सीनियर ऑर्थोपेडिक ज्वाइंट रिप्लेसमेंट सर्जन
कैलाश अस्पताल नोएडा सेक्टर -27
एवं चेयरमैन अर्थराइटिस फाउंडेशन ऑफ इंडिया
हड्डी और जोड़ों की बीमारियां भारत में आम होती जा रही हैं जैसे-जैसे औसत उम्र लंबी हो रही है एक बड़ी आबादी आर्थराइटिस यानी जोड़ों में सूजन और दर्द, ऑस्टियोपोरोसिस यानी हड्डियों में खोखला पन से प्रभावित हो रही है| यहां तक कि युवाओं को भी इन बीमारियों ने चपेट में ले लिया है, इसलिए स्वास्थ्य की दृष्टि से इनका सटीक उपचार व विकल्प महत्वपूर्ण हो गया हैं |
जोड़ों की शुरुआती समस्या को बिना सर्जरी निपटा जा सकता है संतुलित आहार खाएं व्यायाम नियमित करें, वजन पर काबू रखें और चोटों से बचें याद रहे कि उम्र दराज लोगों में होने वाली ओस्टियोआर्थराइटिस विकलांगता का प्रमुख कारण है| सबसे अधिक जोड़ इसी किस्म को गठिया की वजह से बदले जाते हैं लेकिन रूमेटाइड अर्थराइटिस जो कि 20 से 40 वर्ष के लोगों को प्रभावित करती है करीब कुल आबादी का 1% है|
रूमेटाइड अर्थराइटिस से जोड़ों में सूजन और दर्द होता है यू की यह एक जेनेटिक ऑटोइम्यून रोग है इसलिए मुश्किल से जड़ से खत्म किया जाता है इससे भी जोड़ खराब होते हैं और जोड़ों को बदलना पड़ता है| भारत में गठिया के करीब 21 करोड़ से अधिक लोग हैं और इनमें से 5% को जोड़ प्रत्यारोपण की सर्जरी की आवश्यकता है जो कि एक बहुत बड़ा नंबर है|
इसी तरह ऑस्टियोपोरोसिस के भी करीब 7 करोड़ मरीज हैं जिनमें तीन चौथाई महिलाएं हैं इसकी वजह से कूल्हे की हड्डी टूटना एक महामारी की तरह हो गया है, उसके पश्चात कूल्हे के जोड़ को बदलना एकमात्र विकल्प रह जाता है कंधे के जोड़ को प्रत्यारोपण भी किया जाता है कभी-कभी फ्रैक्चर की वजह से कभी-कभी आर्थराइटिस की वजह से ऐसा करना जरूरी हो जाता है वर्तमान में लगभग 200000 घुटने के जोड़ बदले जाते हैं 50,000 कूल्हे के जोड़ बदले जाते हैं और कुछ हजार कंधे भारत में सालाना बदले जाते हैं घुटने के ऑपरेशन में से 98% ओस्टियोआर्थराइटिस के लिए किए जाते हैं करीब 1% से 2% रमी टाइड गठिया के लिए किए जाते हैं करीबन 0.12% एक्सीडेंट और चोट लगने के बाद घुटने जाते हैं
अब उपचार के विकल्पों में हाल में कुछ प्रगति के ऊपर नजर डालते हैं
रिवर्सशोल्डर रिप्लेसमेंट कंधे को अलग तरीके से बदलाव की प्रक्रिया भारत में व्यापक रूप से की जाती है इसके अच्छे परिणाम सामने आए हैं अक्सर जो कंधे के ऊपर के रस्से होते हैं उनकी मरम्मत नहीं हो पाती है और ऐसी स्थिति में यह जो रस्से मांसपेशियों से हड्डी को जोड़ते हैं यह पूरी तरह से बेकार हो जाते हैं और ऐसी स्थिति में रिवर्स शोल्डर किया जाती है | यानी कि यहां कंधे को उल्टा कंधे के जोड़ में बॉल एंड सॉकेट संरचना उलट दी जाती है | एक कृत्रिम बाल कंधे की हड्डी में एक कृत्रिम सॉकेट जो हाथ की हड्डी के ऊपरी हिस्से से जुड़ जाती है इस तरह कंधा कब हाथ के हिलाने में सक्षम होता है | जोड़ का काम में बेहतर बनाने के लिए रिवर शोल्डर रिप्लेसमेंट एक बहुत बेहतरीन विकल्प है खासकर अगर जोड़ में गठिया भी हो |कंधा बदलने के ऑपरेशन के 6 हफ्ते के बाद कंधे के चलने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है और जीवन सामान्य होने लगता है
अब घुटने की बारी
टोटलनी रिप्लेसमेंट एक अत्यधिक सफल सर्जरी है जो न केवल जीवन की गुणवत्ता में सुधार करती है बल्कि जीवन में वर्ष भी जोड़ती है| जांघ की हड्डी यानी फीमर के निचली सतह जो की नीचे के पैर की हड्डी यानी की टीवीया की ऊपर की सतह के साथ जुड़ती है , यह ही घुटने है | और सामने कटोरी यानी पटेला के पीछे की सतह भी बदली जाती है रिकवरी उल्लेखनीय रूप से तेज होती है एक मरीज अगले दिन से चलने में सक्षम होता है और व्यायाम करना शुरू कर देता है 48 घंटे में अपने आप शौचालय जाता है और आमतौर पर लगभग 3 दिनों में अस्पताल में छुट्टी मिल जाती है सीढ़ियां चढ़ने जैसी गतिविधियों को 2 सप्ताह के बाद शुरू किया जाता है | और लगभग 40 दिनों में मरीज अपने काम पर वापस आ सकता है हालांकि घुटना रिप्लेसमेंट लगभग 98 99% सफल रहा सफल ऑपरेशन है एक दो मामलों में 1 या 2% मामलों में जटिलताएं भी हो सकती हैं जैसे संक्रमण अकड़न की फीलिंग और बिना संक्रमण के इम्लांट का ढीला हो जाना ऐसी परिस्थितियों के लिए रिवीजन नी रिप्लेसमेंट बनाया गया है यानी कि दोबारा घुटने का प्रत्यारोपण | आमतौर पर घुटना प्रत्यारोपण 20-25 साल तक चलता है लेकिन कभी-कभी जल्दी करना पड़ जाता है | एक आकलन के अनुसार 2030 तक भारत में करीब 60,000 रिवीजन घुटने के हर साल हुआ करेंगे|.
अब बारी हिप रिप्लेसमेंट की
हिप रिप्लेसमेंट की जरूरत वाले मरीजों की संख्या बढ़ रही है यह अनुमान लगाया गया है कि वर्तमान में हर साल 50,000 से अधिक हिप रिप्लेसमेंट किए जाते हैं | इसमें कोई संदेह नहीं है कि कुल हिप रिप्लेसमेंट का अधिकांश हिस्सा की जांग की हड्डी के ऊपरी हिस्से फैक्चर के कारण किए जाते हैं ऊपरी हिस्से में कुहले की गेंद है के टूट जाने के कारण और उसका सॉकेट एसिटेबुलम जो घिस जाता है उनको बदला जाना ही हिप रिप्लेसमेंट कहलाता है
घुटने के प्रत्यारोपण की तरह कुहले प्रत्यारोपण में भी कुछ जटिलताएं समान हैं इसके अतिरिक्त हिप रिप्लेसमेंट में 1 से 2% केस में डिसलोकेशन हो सकता है यानी कि को कुहले का बाहर निकल जाना | यह एक सर्जन और मरीज दोनों के लिए ही सामान्य रूप से बड़ी मुसीबत बन जाता है | याद रखने वाली एक महत्वपूर्ण बात यह है कि अगर गठिया और ओस्टियोपोरोसिस की व्यापकता को कम करना है तो जीवनशैली में सुधार और उसको नियंत्रित किया जाना बहुत जरूरी है इससे भारी तादाद में पड़ रही वित्तीय प्रभाव को कम किया जा सकेगा साथ ही शुरुआती पहचान और उपचार महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं |अनुसंधान का अपना महत्व है लंबे समय तक चलने वाले जोड़ अगर इजाद किए जाएं अगर बनाए जाएं तो मुमकिन है जिंदगी और बेहतर होगी |
