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20 हेक्टेयर जमीन भूमाफियाओं से मुक्त

एटा : उत्तर प्रदेश के एटा जिले में दस्तावेजों में हेराफेरी कर करीब 20 हेक्टेयर हथियाई गयी जमीन के मामले में पुलिस को भूमाफियाओं के चंगुल से मुक्त करा लिया है। जिलाधिकारी अंकित कुमार अग्रवाल के निर्देश पर उप जिला अधिकारी सदर शिव कुमार सिंह ने 250 बीघा सरकारी बंजर ज़मीन पर सर्वोदय आश्रम का नाम निरस्त कर पहले की तरह सरकारी भूमि बंजर के नाम दर्ज करा दिया है। यह कार्यवाही उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता की धारा 38(2) के तहत की गयी है।
आधिकारिक सूत्रों ने शुक्रवार को बताया कि जिले के कुछ बड़े भू माफियाओं ने कूट रचना कर, तथ्यों को छिपाकर और दुरभि सन्धि कर 250 बीघा ज़मीन को सर्वोदय आश्रम ट्रस्ट को विघटित करते हुए सर्वोदय आश्रम समिति में निहित करा लिया गया था। ये बंजर खाते की भूमि थी जो कि वर्तमान खतौनी में सर्वोदय आश्रम संक्रमणीय भूमिदर के तौर पर दर्ज करा ली गयी थी ।
जाँच में पाया गया कि तथ्यों को छिपाकर दुरभि सन्धि के तहत सरकारी बंजर भूमि का कूट रचित अंतरण किया गया है जो कि विधि विरुद्ध है। जिलाधिकारी ने तत्काल प्रभाव से इस भूमि के सभी गाटा संख्याओं की भूमि के क्रय विक्रय पर रोक लगाकर खतौनी में दर्ज लोगों को नोटिस जारी कर वैधानिक कार्यवाही करने के आदेश दिए गए।
सूत्रों के अनुसार जाँच में पता चला कि ये भूमि बंजर की है और ये स्वर्गीय रोहनलाल चतुर्वेदी पर्व केंद्रीय रेल उप मन्त्री भारत सरकार द्वारा ट्रस्ट को किए गए डीड 19-2-1951 में भी स्पष्ट रूप से अंकित है। इसमें कूट रचना करते हुए सरकारी स्वामित्व की भूमि को व्यक्तिगत लाभ के इस्तेमाल करने के लिये कार्यवाही की गयी है जिसमे राज्य सरकार को हानि हुई है।
अपर जिला अधिकारी प्रशासन आलोक कुमार ने बताया कि दर असल ये जो ज़मीन है ये पहले शुरुआत में बंजर के ही नाम से दर्ज रही है और बाद में ये सर्वोदय आश्रम को दान में देने की दिखाकर के रिकार्डों में हेराफेरी की गयी। जब ये जिला अधिकारी एटा के संज्ञान में आया तो उसमे जिला अधिकारी द्वारा जांच कराई गयी और जाँच कराने के उपरांत एसडीएम सदर के द्वारा विधिक कार्यवाही करते हुए इसे पुनः बंजर में दर्ज करा दिया गया है। ये ज़मीन सर्वोदय आश्रम के नाम से दर्ज की गयी थी और इसमें किसने हेराफेरी की इसकी जांच चल रही है।
उन्होंने बताया कि वर्तमान में ये ज़मीन बड़ी है और इसमें रिकॉर्ड की पर्याप्त छान बीन करने की आवश्यकता है। ये ज़मीन 20 हेक्टेयर यानी 250 बीघा के आस पास है जिसकी कीमत कई करोड़ रुपये है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों ने इसमें हेराफेरी की है उनके ऊपर परीक्षण के उपरांत नयमानुसार शख्त से शख्त कार्यवाही की जाएगी।
कुमार ने बताया कि ये ज़मीन भूदान की नहीं है ये बंजर की ज़मीन है। ये मनोज चतुर्वेदी के नाम रिकॉर्ड में रही है लेकिन जांच के बाद जो भी भूमिका होंगी उसको हम लोग सामने लाएंगे और उसके अनुसार ही कार्यवाही होंगी।
उल्लेखनीय है कि भू माफिया इस ज़मीन में से कुछ ज़मीन की बिक्री भी कर चुके है और भोले भाले लोगों की गाढ़ी कमाई पर डाका डाल चुके हैं। ऐसे में अब जिला प्रशासन ये जांच भी कर रहा है कि आखिर किस व्यक्ति ने ये बंजर की ज़मीन बेंच दी और किन किन लोगों ने ये ज़मीन खरीदी है। जिन लोगों ने ये ज़मीन खरीदी थी उनके बैनामे केंसिल होकर ये ज़मीन अब सरकारी बंजर की ज़मीन कहलाएगी।

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