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राजीविका की बदौलत महिलाओं को मिला रोजगार

उदयपुर : राजस्थान ग्रामीण आजीविका विकास परिषद (राजीविका) द्वारा संचालित अंब्रेला योजना स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में निवासरत लोगों को रोजगार दिलाने में वरदान साबित हुई है। राजीविका के समूहों की महिलाओं के परिवारों की आजीविका को बढ़ाने के लिये बाघपुरा में सरस डेयरी, आरसेटी एवं पशुपालन विभाग के सक्रिय सहयोग के साथ राजीविका परिवार से जुडी बहनों के लिये बाघपुरा सीएलएफ पर नारीशक्ति बकरी दूध संग्रह केंद्र की शुरुआत की गई।
नारीशक्ति बकरी दूध संग्रह केंद्र को कई स्वयं सहायता समूहों की महिलाओं ने अपनी बकरियों का दूध विक्रय करने का कार्य शुरू किया। इससे नारीशक्ति बकरी दूध संग्रह केंद्र को दूध प्राप्त होने लगा, साथ ही उन महिलाओं को भी आय का जरिया मिल गया जिनके घर बकरियाँ पाली जा रही थी और जिनका दूध सिर्फ घरों में ही काम आ रहा था। आज बाघपुरा ग्राम स्थित नारीशक्ति बकरी दूध संग्रह केंद्र से जुड़ी महिलाओं को नियमित रूप से आय होने लगी है और कई महिलाओं को आर्थिक सम्बल मिला है।
इंद्रा स्वयं सहायता समूह रिछावर की समुडी देवी बताती हैं कि पहले वे बकरी के दूध को नहीं बेचते थे, इसका उपयोग घर में ही लेते थे, क्योंकि ऐसी बकरी दूध की कोई डेयरी यहाँ नहीं थी लेकिन अब इनके दूध को बेचकर महीने में 700 से 750 रूपये कमा लेते है और एक टाइम का दूध घर में भी काम आता है, इस पैसे से घर के खर्च में मदद मिल रही है। ऐसे ही मीरादातार स्वयं सहायता समूह गोरण की केशर देवी ने बताया कि उनके पास 8 बकरियाँ है, ये सभी देशी बकरी है, पहले गाँव में किसी को जरुरत होती थी तब कम दाम पर दूध विक्रय करना पड़ता था लेकिन अब बकरी दूध डेयरी खुलने से वह अपनी बकरियों का दूध वहाँ विक्रय कर पा रही है तथा बकरीपालन का 16 दिवसीय प्रशिक्षण भी लिया है।
तारा स्वयं सहायता समूह नाडी फला की लीला देवी ने बताया कि उन्हें भी नारीशक्ति बकरी दूध संग्रह केंद्र से जुड़ कर काफी लाभ मिला है। विशेषज्ञों के अनुसार बकरी का दूध मानव शरीर के लिए अत्यंत फायदेमंद होता है। इस दूध से ब्लड प्रेशर कम होता है, इम्यून सिस्टम बढ़ता है, हड्डियां मजबूत होती है, आंतों की सूजन काम होती है, पाचन क्रिया बेहतर होती है, डेंगू में भी लाभकारी है तथा प्लेट रेट बढ़ाने में मदद मिलती है।

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