नई दिल्ली : आरिफ मोहम्मद खान ने मंगलवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रयासों से विश्व की सबसे प्राचीन योग विद्या को पुन: प्रतिष्ठा मिली तथा ‘विश्व योग दिवस’ मनाये जाने के साथ ही भारत को फिर योग केन्द्र के रूप में पहचान मिली है।
खान ने महावीर जयंती के अवसर पर यहां आयोजित एक कार्यक्रम में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी के उस कथन को उद्धरित किया जिसमें महात्मा ने कहा था कि हमारी इस प्रकृति के पास पूरी दुनिया के मनुष्यों की जरूरतों को संतुष्ट करने की दौलत और सामर्थ्य है लेकिन वह एक लोभी व्यक्ति की लालसा पूरी करने में सक्षम नहीं है।
खान ने कहा कि सृष्टि की रचना के समय से ही महापुरुषों ने मानाव जाति का मार्गदर्शन किया है और इस काल में भी श्री श्री रविशंकर जैसे महापुरुष यह काम कर रहे हैं। सम्मेलन में श्री श्री रविशंकर के अलावा केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर, पुरषोत्तम रूपाला तथा कई अन्य अन्य गणमान्य व्यक्ति उपस्थित थे। खान ने कहा कि जैन समुदाय अपने आदर्शों और विचारों के साथ अहिंसक एवं शांतिप्रिय समाज रहा है। इस समुदाय का समाज व राष्ट्र निर्माण में विशिष्ट योगदान है और समाज सेवा के क्षेत्र में इसने एक मिसाल कायम की है।
उन्होंने कहा कि महावीर स्वामी का अनेकांत दर्शन धार्मिक असहिष्णुता को खत्म कर समाज में समरसता की भावना उत्पन्न करता है जिसकी मौजूदा समय में अधिक आवश्यकता है। उन्होंने कहा, “हमारे देश में स्थापित योग केन्द्र, सूर्य उपासना केन्द्र और आयुर्वेद केन्द्र के साथ-साथ विश्व शांति केन्द्र भी स्थापित होने वाला है, जो समूचे विश्व मानव के लिए उपयोगी होगा।”
मोदी सरकार ने योग को पुन: प्रतिष्ठा दिलायी
