लखनऊ : इलाहाबाद उच्च न्यायालय की लखनऊ खंडपीठ ने कथित धर्मांतरण के आरोप में गिरफ्तार इस्लामिक विद्वान मौलाना कलीम सिद्दीकी की जमानत याचिका बुधवार को मंजूर कर ली जिससे उनकी रिहाई का रास्ता साफ हो गया है। उच्च न्यायालय के वरिष्ठ वकील और कलीम सिद्दीकी के मामले को देखने वाली कानूनी टीम के सदस्य एडवोकेट आमिर नकवी ने कहा कि मौलाना की जमानत पर जस्टिस मसौदी की अदालत में सुनवाई हुई। वरिष्ठ अधिवक्ता आईबी सिंह कलीम सिद्दीकी का पक्ष प्रस्तुत करने के लिए उपस्थित हुए जबकि अधिवक्ता तल्हारी ने एनआईए के लिए अपनी दलीलें पेश कीं।
गौरतलब हो कि उत्तर प्रदेश पुलिस की स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) ने साल 2021 में विदेशी फंडिंग के तहत देश में कथित धर्म परिवर्तन कराने वाले समूह का खुलासा करने का दावा करते हुए मौलाना कलीम सिद्दीकी को गिरफ्तार किया था। मौलाना की गिरफ्तारी के समय पुलिस ने दावा किया था कि मौलाना धर्म परिवर्तन में शामिल थे और राष्ट्रीय स्तर पर विभिन्न शैक्षणिक और सामाजिक संस्थानों की आड़ में धर्म परिवर्तन किया जा रहा था। इसके लिए विदेशों से फंडिंग की जा रही है। इस काम में देश के कई जाने-माने लोग और संस्थाएं शामिल हैं।
मौलाना कलीम सिद्दीकी की गिरफ्तारी के बाद एटीएस ने कथित धर्मांतरण के मामले में कई लोगों को गिरफ्तार किया था। इस मामले से पहले एटीएस ने 20 जून को मौलाना उमर गौतम और जहांगीर आलम को गिरफ्तार किया था और दावा किया था कि ये लोग बड़े पैमाने पर जबरन धर्म परिवर्तन करवा रहे थे।
मौलाना कलीम सिद्दीकी को मिली ज़मानत
