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हनुमान जन्मोत्सव पर लगी धर्म संसद, साधु संतों ने कहा श्री रामचरित मानस है राष्ट्रीय ग्रंथ

शोभा यात्रा व यज्ञ के साथ प्रारंभ हुआ पांच दिवसीय सनातन संस्कृति समागम
दक्षिण दिल्ली।
श्री राम कर्मभूमि न्यास एवं नमो सद्भावना समिति के संयुक्त तत्वाधान में हनुमान जन्मोत्सव के मौके पर छतरपुर हनुमान मंदिर परिसर में गुरुवार से पांच दिवसीय सनातन संस्कृति समागम का शुभारंभ हुआ। सुबह 2,000 से अधिक महिलाओं ने कलश यात्रा निकाली। जय श्री राम जय हनुमान के नारे से पूरा छतरपुर मंदिर परिसर गुंजायमान रहा। इसके उपरांत भारत विश्व गुरु बने इसके लिए दक्षिण भारत से आए प्रकांड विद्वानों ने यज्ञ का शुभारंभ किया। बड़ी संख्या में श्रद्धालु यज्ञ में शामिल हुए। इसके उपरांत धर्म संसद लगा। जिसमें साधु संतों ने कहा कि यू तो श्री रामचरित मानस राष्ट्रीय ग्रंथ है ही, सरकार को भी इसे घोषित करना चाहिए। इसके लिए नियमित रूप से अभियान चलता रहेगा। वैदिक मंत्रों के साथ धर्म संसद का शुभारंभ हुआ।
नमो सद्भावना समिति के महासचिव मुरली कृष्ण ने बताया कि वायु अग्नि, पृथ्वी, जल ल, आकाश तत्व को ध्यान में रखकर पांच हवन कुंड बनाए गए हैं। इसमें श्रद्धालुओं ने यज्ञ का शुभारंभ किया। यज्ञशाला का नाम गणपति, आदित्य योगिनी महारुद्र, धनवंतरी यज्ञशाला दिया गया है। इसमें प्रतिदिन भारत विश्व गुरु बने, इसके लिए यज्ञ होगा। प्रतिदिन शाम में सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया है। समागम के संरक्षक केंद्रीय मंत्री अश्विनी कुमार चौबे हैं। विषय प्रवेश श्रीराम कर्मभूमि न्यास के अध्यक्ष कृष्णकांतओझा ने की।
आवाहन पीठाधीश्वर आचार्य महामंडलेश्वर अनन्त श्री श्री विभूषित स्वामी अवधूत बाबा अरुण गिरी जी महाराज पर्यावरण बाबा ऋषिकेश ने कहा कि यज्ञ ही जीवन है। पर्यावरण संरक्षण का संकल्प दिलाया। श्री पंच दशनाम आवाहन अखाड़ा श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर श्री त्रयम्बकेश्वर स्वामी चैतन्य जी महाराज, श्री स्वामी करपात्रधाम, वृंदावनधाम ने कहा कि आचार्य रामसुदर्शन मिश्र नैयायिक धाम वृन्दावन, स्वामी रामदास जी, महाराज, श्री श्री 1008 जगद्गुरुस्वामी विश्वेश प्रपन्नाचार्य जी, महाराज सुग्रीव किला अयोध्या, श्री श्री 1008 स्वामी फूलडोल बिहारी दास जी महाराज, चतुश सम्प्रदाय अध्यक्ष, चैतन्य कुटी, अध्यक्षीय सम्बोधन श्री श्री 1008 जगद्गुरु स्वामी रामानुजाचार्य श्री स्वामी अनन्ताचार्य जी, महाराज, वृन्दावन पीठाधीश्वर, श्री रसिक प्रगट जी, रांडल माता सौराष्ट्र, महंत गिरी राज गिरी , जूना गढ़, महंत हिम्मत गिरी जी, भाव नगर गुजरात ने अपने विचार रखे।

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