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जीवन में सफलता और विफलता दोनों ही का अपना महत्व

उदयपुर : राजनाथ सिंह ने कहा है कि जीवन में सफलता और विफलता दोनों का ही अपना महत्व है। सिंह आज यहां जनार्दन राय नागर राजस्थान विद्यापीठ डीम्ड टू बी विश्वविद्यालय उदयपुर के 16वें दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में संबोधित कर रहे थे। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि असफलताएं हमें निखारने आती हैं, असफलता के बाद हमेशा कोशिश जारी रखनी चाहिए और सीखते हुए जीवन में आगे बढना चाहिए। उन्होंने कहा कि अभिभावक भी अपने बच्चों की योग्यताओं और क्षमताओं का आकलन उनके परिणामों से नहीं करके उनके सीखने के प्रयासों से करें। कोई भी लक्ष्य जीवन से बडा नहीं हो सकता है। युवाओं का परीक्षाओं के दबाव में जीवन को खोना हमारी सामाजिक विफलताओं को बताता है। इसके लिए हम स्वयं जिम्मेदार हैं।
विद्यापीठ में विज्ञान प्रौद्योगिकी, चिकित्सा आधारित पाठयक्रमों के साथ-साथ प्रताप, मीरा के शोध पीठों का कार्य विद्यापीठ के प्राचीन और नवीनतम विचारों के समन्वय का प्रतीक है। राष्ट्र की वैश्विक प्रगति एवं विश्व गुरू के सम्मान का आधार उद्यमिता, कौशल विकास और नवीन अनुसंधानों से युक्त आज की युवा पीढी है। सरकार युवाओं के समग्र विकास हेतु लगातार प्रयासरत है। जब तक हम विद्यार्थियों का कॉम्प्रिहेंसिव विकास नहीं करते, तब तक राष्ट्र के संपूर्ण विकास की कल्पना नहीं हो सकती।
उन्होंने कहा कि देश लगातार आगे बढ रहा है। वर्ष 2027 तक विश्व की टॉप थ्री इकोनोमी में शामिल हो जाएगा। आज दुनिया के लोग भारत में अपने सपने देख रहे हैं और भारत के साथ कदम से कदम मिला कर चल रहे हैं। आज यदि भारत अंतर्राष्ट्रीय मंचों पर बोलता है तो पूरी दुनिया हमें कान खोलकर सुनती है।
समारोह में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. एस एस सारंदेवोत ने बताया कि समारोह से पूर्व सिंह को एनसीसी के कैडेटस ने गार्ड आफ ऑनर प्रदान किया। इसके बाद दो करोड़ रूपयों की लागत से तैयार पवेलियन, क्रिकेट स्टेडियम व प्रातः स्मरणीय महाराणा प्रताप की चेतक आरूढ़ प्रतिमा का लोकार्पण कर नमन किया। कुलपति प्रो सारंगदेवोत ने बताया कि रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने 32 पी.एचडी धारकों को उपाधियां और 14 स्नातक व स्नातकोत्तर स्तर के स्वर्णपदक प्रदान किए। समारोह की शुरूआत में रित्विका अकादमिक प्रोसेशन से हुई।

कर्नाटक भाजपा उपाध्यक्ष डॉ. तेजस्विनी अनंत कुमार को जनार्दनराय नागर संस्कृति रत्न सम्मान से नवाजा गया जिसके तहत उन्हें रजत पत्र, प्रतीक चिन्ह, उपरणा, पगड़ी, प्रशस्ति पत्र व एक लाख रूपये नकद राशि दी गई। यह सम्मान उन्हें अपने अगम्य चेतना फाउण्डेशन द्वारा भारतीय समाज, संस्कृति, प्रकृति व बच्चों की उन्नति हेतु विशिष्ट कार्यों को करने केे लिए प्रदान किया गया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के पूर्व अध्यक्ष प्रो. डी.पी. सिंह, शिक्षाविद् एवं समाजसेवी अनिल सिंह, दीनदयाल उपाध्याय विवि गोरखपुर युपी के कुलपति प्रो. राजेश सिंह, श्रीगोविन्द गुरू विवि गोधरा के कुलपति प्रो. प्रताप सिंह चौहान, कुल प्रमुख बीएल गुर्जर, रजिस्ट्रार हेमशंकर दाधीच ने भी विचार व्यक्त किए।

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