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अमृतकाल में समय पर न्‍याय भी सुनिश्चित हो

मुरैना : गिरीश गौतम ने आज कहा कि अमृत काल में यह भी सुनिश्चित होना चाहिए कि पीड़ितों को समय पर न्‍याय मिले। गौतम यहां अधिवक्ता परिषद मध्य भारत प्रांत के प्रथम प्रान्तीय अधिवेशन-2023 को मुख्‍य अ‍तिथि के तौर पर संबोधित कर रहे थे। कार्यक्रम मेंं उच्च न्यायालय के महाधिवक्ता प्रशान्त सिंह तथा हाईकोर्ट एवं ज़िला न्यायालय के अधिवक्ता उपस्थित थे। इस सम्मेलन मे ‘अमृत काल में भारतीय न्याय व्यवस्था के बदलते आयाम’ पर चर्चा हुई। संवाद में प्रमुख वक्ता गौतम ने न्यायपालिका के लंबित मामलों तथा न्यायालय की भूमिका तथा अधिवक्ता के दायित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि अधिवक्‍ता परिषद के गठन का उद्देश्‍य क्‍या है, इस पर सभी को विचार करना चाहिए। अधिवक्‍ताओं के हितों का ध्‍यान रखने के लिए ये संस्‍थाएं काम कर रही है।

गौतम ने कहा कि आज देश में 6 करोड़ 88 लाख से ज्‍यादा मामले कोर्ट में लंबित है। देरी से मिलने वाला न्‍याय, न्‍याय नहीं रह जाता है, इसलिए अमृत काल में यह भी सुनिश्चित होना चाहिए कि कोर्ट केस का लंबित रहना समाप्‍त हो और पीड़ितों को समय पर न्‍याय मिले। गौतम ने कहा कि राम मंदिर का निर्णय भावना को ध्‍यान में किया गया। यही होना भी चाहिए। ‘जजमेंट’ नहीं, ‘जस्टिस’ होना चाहिए, इसलिए यह कहना चाहिए कि राम मंदिर के मामले में जस्टिस हुआ है। गौतम ने भारतीय संस्‍कृति के महत्‍व पर भी प्रकाश डाला। उन्‍होंने कहा कि धीरे-धीरे हम अपनी संस्‍कृति को भूलते जा रहे हैं, इसका प्रतिकूल प्रभाव हमारी सामाजिक व्‍यवस्‍था पर पड़ा है और विसं‍गतियां सामने आई हैं। उन्‍होंने कहा कि पहले पंच को परमेश्‍वर माना जाता था। पंच के पद पर बैठने वाला अपना पराया छोड़कर न्‍याय करता था, लेकिन आज यह विचार समाप्‍त हो गया है। इस पर गंभीरता से चिंतना होना चाहिए।

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