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अक्षय तृतीया एवं ईद पर बाल विवाह रोकने की अपील

नई दिल्ली : कैलाश सत्यार्त्थी चिल्ड्रेन फाउंडेशन (केएससीएफ)और अन्य गैर सरकारी संगठनों ने ईद और अक्षय तृतीया के अवसर पर संभावित बाल विवाहों को रोकने की अपील की है। फाउंडेशन ने बृहस्पतिवार को यहां 22 अप्रैल को अक्षय तृतीया एवं ईद के अवसर को ध्यान में रखते हुए “बाल विवाह मुक्त भारत” पर राष्ट्रीय परिचर्चा एवं विमर्श का आयोजन किया। इस अवसर पर देशभर से जुटे गैर सरकारी संगठनों ने सरकार से एक सुर में बाल विवाह के खिलाफ मजबूत कानून बनाने और मौजूदा कानून का सख्ती से पालन सुनिश्चित करने की अपील की। साथ ही सरकार से बाल विवाह निषेध कोष बनाने और 18 साल तक के बच्चों के लिए मुफ्त शिक्षा का प्रावधान करने की भी मांग की गई। देश में बालविवाह का आयोजन ज्यादातर अक्षय तृतीया तथा ईद के अवसरों पर होता है।
गैर सरकारी संगठन इस बात पर सहमत हैं कि देश में भले ही बाल विवाह कराने वाले लोगों को दंडित करने के लिए विशेष कानून अर्थात बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006 है लेकिन फिर भी बाल विवाह को समूल नष्ट करने के लिए वर्तमान क़ानून को संशोधित कर मजबूत बनाने की जरूरत है। साथ ही मौजूदा कानून का कड़ाई से पालन सुनिश्चत करने की जरूरत है। वर्ष 2030 तक बाल विवाह मुक्त भारत बनाने के लिए गैरसरकारी संस्थाओं ने कई प्रकार के उपायों पर बात की। परिचर्चा के दौरान कहा गया कि सरकारी स्कूलों में पढ़ रही बच्चियों को प्रतिमाह 500 रुपये की छात्रवृत्ति दी जा सकती है, जिससे वह अपनी शिक्षा जारी रख सकें। सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाली उन लड़कियों के लिए प्रधानमंत्री शगुन कोष का भी गठन किया जा सकता है, जिनका विवाह कानूनी उम्र में होने पर उन्हें सरकार द्वारा 11,000 रुपये का उपहार दिया सकता है।

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