10 दिन में स्वतंत्र कमेटी गठन के निर्देश
नैनीताल : उत्तराखंड में गंगा नदी के रायवाला से भोपुर तक अगले कुछ दिनों तक खनन पर प्रतिबंध रहेगा। उत्तराखंड उच्च न्यायालय ने खनन पर रोक की अवधि को बढ़ा दिया है। साथ ही अवैध खनन पर निगरानी के लिये प्रदेश सरकार को दस दिन के अदंर से उच्च स्तरीय स्वतंत्र कमेटी के गठन के निर्देश दिये हैं। कमेटी में सरकार के अलावा स्वतंत्र सदस्यों को शामिल करने को कहा गया है।
गंगा नदी में अवैध खनन के खिलाफ हरिद्वार की मातृ सदन व अन्य की ओर से दायर जनहित याचिकाओं पर शुक्रवार को मुख्य न्यायाधीश विपिन सांघी व न्यायमूर्ति मनोज कुमार तिवारी की युगलपीठ में सुनवाई हुई। राज्य सरकार की ओर से शपथ पत्र पेश कर कहा गया कि अदालत के 15 दिसंबर, 2022 के आदेश के अनुपालन में खनन पर निगरानी के लिये कमेटी का गठन कर दिया गया है। जिसमें जिला स्तरीय अधिकारी शामिल हैं। इसमें अवैध खनन के लिये अधिकारियों की जिम्मेदारी तय की गयी है।
दूसरी ओर केन्द्र सरकार के जलवायु एवं पर्यावरण मंत्रालय की ओर से कहा गया कि गंगा में खनन के लिये आईआईटी कानपुर की रिपोर्ट व पर्यावरण मूल्यांकन कमेटी (ईएसी) की संस्तुति आवश्यक है और उसी के मद्देनजर खनन किया जा सकेगा।अदालत राज्य सरकार की ओर से गठित कमेटी से संतुष्ट नजर नहीं आयी और प्रदेश सरकार को निर्देश दिये कि दुबारा से प्रदेशस्तरीय निगरानी कमेटी बनायी जाये और उसमें पर्यावरणविद्, ब्यूरोक्रेट्स एवं न्यायिक जगत के सेवानिवृत्त व स्वतंत्र लोगों को शामिल किया जाये।
अदालत ने रायवाला से भोपुर तक खनन पर लगी रोक को अगली सुनवाई तक बढ़ा दिया है। साथ ही सरकार को 10 दिन के अदंर अनुपालन रिपोर्ट पेश करने को कहा है। इस मामले में अगली सुनवाई दस दिन बाद हो सकेगी। यहां बता दें कि मातृ सदन व अन्य की ओर से अलग अलग जनहित याचिका दायर कर गंगा नदी में खनन को चुनौती दी गयी है। मातृ सदन की ओर से कहा गया है कि आईआईटी कानपुर की रिपोर्ट में गंगा नदी में खनन को उपयुक्त नहीं माना गया है। राज्य सरकार रिपोर्ट को गलत आकलन कर रही है।
