श्रीनगर। श्रीनगर की ऐतिहासिक जामिया मस्जिद में चार साल बाद जुमे-उल-विदा (रमजान के आखिरी शुक्रवार) की सामूहिक नमाज की अनुमति दी गई। अधिकारियों ने पिछले हफ्ते सामूहिक जुमे की नमाज को नामंजूर कर दिया था, जिसकी राजनेताओं और आम जनता ने व्यापक आलोचना की थी।
प्रत्यक्षदर्शियों ने कहा कि पुराने शहर के नौहट्टा इलाके में स्थित जामिया मस्जिद में जुमे की नमाज में कश्मीर के विभिन्न हिस्सों से हजारों लोग शामिल हुए। अधिकारियों ने इलाके में सुरक्षा भी बढ़ा दी थी। अतीत में जामिया मस्जिद विरोध प्रदर्शनों का केंद्र रहा है और हिंसक प्रदर्शनों का गवाह भी रहा है। अधिकारियों ने बताया कि मस्जिद में शांतिपूर्ण तरीके से नाम अदा की गयी। जामिया मस्जिद के प्रबंध निकाय अंजुमन औकाफ ने कहा कि हजारों पुरुषों, महिलाओं और युवाओं ने सर्वशक्तिमान अल्लाह के सामने खुद को सजदा करके और अपने पापों पर पश्चाताप करके और अपने भगवान से क्षमा मांगकर श्रीनगर मस्जिद में शुक्रवार की नमाज अदा की। अंजुमन के एक प्रवक्ता ने कहा कि जामिया मस्जिद के लोग एक बार फिर मीरवाइज-ए-कश्मीर मौलवी मुहम्मद उमर फारूक की अनुपस्थिति से निराश हैं, जो पिछले लगभग चार वर्षों से नजरबंद हैं।
प्रवक्ता ने एक विशाल जनसभा में लोगों को हिरासत में लिए गए मीरवाइज के ईद-उल-फितर के संदेश से अवगत कराया और उनसे इस्लामी शिक्षाओं के अनुसार सादगी से ईद मनाने की अपील की। उन्होंने कहा, उन्हें उत्सव में समाज के गरीब, जरूरतमंद, पिछड़े और वंचित लोगों को याद करने का आग्रह किया गया। सत्रह अप्रैल को शब-ए-कदर के शांतिपूर्ण आयोजन और जुमे-उल-विदा की नमाज के साथ, इस बात की पूरी संभावना है कि शुक्रवार को भव्य मस्जिद में ईद की नमाज की अनुमति दी जाएगी। अंजुमन औकाफ ने ऐलान किया है कि ईद की नमाज सुबह नौ बजे मस्जिद में होगी।
श्रीनगर के ऐतिहासिक जामिया मस्जिद में चार साल बाद अदा की गयी नमाज
