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चौधरी चरण सिंह कृषि विश्वविद्यालय के 25वें दीक्षांत समारोह को राष्ट्रपति ने किया संबोधित

भारत कृषि के क्षेत्र में लगातार बढ़ रहा आगे : राष्ट्रपति

विश्वविद्यालय को दिया कृषि क्षेत्र में नित नये अन्वेषण का श्रेय

राष्ट्रपति ने कृषि से जुड़ी समस्याएंँ एवं उन्नत किश्म के बीजों के उत्पादन से जुड़े रिसर्च और प्रयोग पर विस्तार से किया ज़िक्र

राष्ट्रपति : मुझे खुशी है कि आज मेडल पाने वाले छात्रों में आधे से ज्यादा हैं बेटियां

पराली जलाने से रोकने के लिए कृषकों को किया जागरूक

कपिल शर्मा | गौरवशाली भारत

हिसार। चौधरी चरण सिंह कृषि विश्वविद्यालय (एचएयू) के 25वें दीक्षांत समारोह में सोमवार शाम भव्य आयोजन हुआ। इस समारोह में भारत की माननीया राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने इस अवसर पर विश्वविद्यालय के इंदिरा गांधी सभागार में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू 865 स्नातकों को उपाधि से सम्मानित किया। साथ ही 124 विद्यार्थियों को स्वर्ण पदक प्रदान किए। कृषि विश्वविद्यालय के 25वें दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता प्रदेश के राज्यपाल एवं विश्वविद्यालय के कुलाधिपति बंडारू दत्तात्रेय ने की। मुख्यमंत्री मनोहर लाल अति विशिष्ट अतिथि व कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री जेपी दलाल विशिष्ट अतिथि के तौर पर मौजूद रहे।

इस दौरान भारत की माननीया राष्ट्रपति मुर्मू ने अपने संबोधन में कहा कि आज केवल डिग्री, मेडल लेने का दिन नहीं है, बल्कि अर्जित क्षमताओं के माध्यम से नई चुनौतियों को स्वीकार करने का अवसर है। आज आधे से ज्यादा बेटियां डिग्री लेने वाली हैं, मेडल लेने वाली में भी बेटियों की संख्या ज्यादा है। इससे साबित होता है कि बेटियां हर क्षेत्र में आगे हैं। माननीय राष्ट्रपति महोदया द्रोपति मुर्मू ने कहा क्या आप जानते हैं, मैं किसान की बेटी हूंँ, बहुत सारे विषयों से मेरा रुचि है। लेकिन, ज्यादातर रूचि किसानों से जुड़े विषयों पर है। मैं जानना चाहती थी भारत की जनसंख्या जिस गति से बढ़ रहा है। उसी के हिसाब से अन्नदाता या किसान के लिए कृषि विश्वविद्यालय की छात्राएँ क्या-क्या व्यवस्था कर रही हैं। खाद्यान्न भंडारण में हरियाणा दूसरे स्थान पर है। ‘मुझे खुशी है कि आज मेडल पाने वाले छात्रों में आधे से ज्यादा बेटियां है। बेटियां सभी क्षेत्रों में आगे बढ़ रही है।

राष्ट्रपति ने आगे कहा – आज जलवायु परिवर्तन, जनसंख्या का विसपरण जैसी समस्याओं को सामने रखते हुए कृषि क्षेत्रों को कैसे बढ़ावा दिया जाए इसके बारे में जानना चाहती थी। मैं खुद सीखना चाहती थी, मुझे खुशी है यह कृषि विश्वविद्यालय किसानों के लिए, केवल हरियाणा के लिए नहीं, पूरे भारत और पूरे विश्व के लिए सोच रहा है। आज बहुत सारे बच्चे मिट्टी से जुड़े कार्यक्षेत्र में कार्य नहीं करना चाहते। लेकिन, मैं देख रही हूँ यहाँ लड़की हो या लड़का किसानों से जुड़ी हर चीज़ को जानना चाहते हैं, सिखना चाहते हैं और किसानों की समस्याओं का समाधान करने के लिए आगे बढ़ रहे हैं।… परिस्थिति जैसी भी आए किसान को तैयार करने के लिए, भारत की मिट्टी को प्रस्तुत करने के लिए और अच्छा उपज के लिए क्लाइमेट चेंज तो है ही प्रकृत्ति के साथ हमें लड़ते-लड़ते मुझे लगता है कि भारत के किसानों का भारत की जनता की समस्याओं के समाधान में हर ध्यान देने में मुझे लगता है कोई भी समस्या नहीं आएगा। इसलिए विश्वविद्यालय तैयार है। मैं विश्वविद्यालय के कुलपति, यहाँ के अध्यापकों को, यहाँ के वैज्ञानिकों को बहुत-बहुत धन्यवाद देना चाहती हूँ। मैं पुनः एक बार फिर डिग्री प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को बधाई देती हूं और उज्वल भविष्य की कामना करती हूँ। मैं आशा करती हूँ कि, आप सभी अपने दृढ़ संकल्प, समर्पण और इमानदार प्रयासों से राष्ट्र निर्माण में अपना अमूल्य योगदान देंगे। थैंक्यू, धन्यवाद! जय हिंद! जय भारत, जय किसान

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