चंडीगढ़ : मलविंदर सिंह कंग ने गुरुवार कहा कि उच्चतम न्यायालय का दिल्ली सरकार को अधिकारियों की नियुक्ति और तबादलों सहित प्रशासनिक अधिकारों का निर्णय लेने का अधिकार देना दिल्ली सरकार की जीत है। कंग ने गुरुवार को यहां पत्रकारों को संबोधित करते हुए कहा कि आज के समय में लोकतंत्र को बचाने की आखिरी उम्मीद उच्चतम न्यायालय ही है क्योंकि केंद्र की मोदी सरकार लगातार दिल्ली सहित देश के सभी राज्यों के अधिकारों को समाप्त कर अपनी तानाशाही स्थापित करने की कोशिश कर रही है। आज के फैसले ने यह साबित कर दिया है कि उच्चतम न्यायालय किसी को भी संविधान की भावना से खिलवाड़ करने की अनुमति नहीं देगा।
उन्होंने कहा कि राज्यपाल और उप-राज्यपाल के माध्यम से राज्यों की चुनी हुई सरकारों के काम में भाजपा का अनावश्यक हस्तक्षेप और लगातार राज्यों के अधिकारों को सीमित करना और उन्हें कमजोर करना देश के संघीय ढांचे के विपरीत है। भाजपा का यह रवैया किसी भी तरह से देश हित में नहीं है। उन्होंने अरविंद केजरीवाल सरकार का जिक्र करते कहा कि दिल्ली की जनता ने दो बार प्रचंड बहुमत देकर केजरीवाल को अपना नेता चुना, लेकिन केंद्र की भाजपा सरकार ने उनके काम में दखल देना जारी रखा और एक अधिसूचना जारी कर अधिकारियों के तबादले का अधिकार छीन लिया। केजरीवाल ने पिछले एक दशक से देश और दिल्ली की जनता के अधिकारों के लिए लंबी लड़ाई लड़ी और आज सुप्रीम कोर्ट ने भाजपा की तानाशाही पर करारा तमाचा लगाया।
कंग ने दिल्ली के लोगों के अधिकारों की लड़ाई में केजरीवाल का समर्थन करने वाले लोगों और उच्चतम न्यायालय का धन्यवाद किया और भाजपा को चेतावनी देते हुए कहा कि अब समय आ गया है कि केंद्र यह समझे कि देश में अब तानाशाही नहीं चलेगी। अब लोग संसद से लेकर सड़कों तक इसका विरोध करेंगे। गौरतलब है कि गुरुवार को उच्चतम न्यायालय ने तबादले और नियुक्ति के अधिकारों को दिल्ली सरकार के अधीन करने का फैसला दिया है।
उच्चतम न्यायालय का फैसला लोकतंत्र की जीत
