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पापुआ न्यूगिनी से साझीदारी मजबूत करेगा भारत

पोर्ट मोरेस्बी (पापुआ न्यूगिनी) : भारत एवं प्रशांत महासागर के द्वीपीय देश पापुआ न्यूगिनी ने व्यापार और निवेश, स्वास्थ्य, क्षमता निर्माण, कौशल विकास एवं सूचना प्रौद्योगिकी सहित विभिन्न क्षेत्रों में अपनी साझीदारी मजबूत बनाने के साथ ही भारतीय सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में योगदान देने पर सहमति जतायी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पापुआ न्यूगिनी के प्रधानमंत्री जेम्स मारापे के बीच आज यहां एक द्विपक्षीय बैठक में यह सहमति जतायी गयी। फोरम फॉर इंडिया-पैसिफिक आइलैंड्स कोऑपरेशन (फिपिक) के तीसरे शिखर सम्मेलन के इतर हुई इस मुलाकात में मोदी ने पोर्ट मोरेस्बी में गर्मजोशी से स्वागत करने और तीसरे फिपिक शिखर सम्मेलन की सह-मेजबानी करने के लिए प्रधानमंत्री मारपे को धन्यवाद दिया।
विदेश मंत्रालय के अनुसार दोनों नेताओं ने अपने द्विपक्षीय संबंधों का जायजा लिया और व्यापार और निवेश, स्वास्थ्य, क्षमता निर्माण और कौशल विकास और सूचना प्रौद्योगिकी सहित विभिन्न क्षेत्रों में अपनी साझेदारी को और मजबूत करने के तरीकों और साधनों पर चर्चा की। उन्होंने जलवायु कार्रवाई से संबंधित मुद्दों और लोगों के बीच संबंधों को बढ़ावा देने पर भी चर्चा की। प्रधान मंत्री ने प्रशांत द्वीपीय राष्ट्रों की प्राथमिकताओं और इच्छाओं के लिए भारत के समर्थन और सम्मान को दोहराया।
प्रधानमंत्री मोदी और प्रधानमंत्री मारापे ने पापुआ न्यूगिनी की टोक पिसिन भाषा में तमिल ग्रंथ ‘थिरुक्कुरल’ का अनूदित संस्करण का विमोचन किया। थिरुक्कुरल का अनुवाद सुप्रसिद्ध भाषाविद् श्रीमती शुभा शशीन्द्रन और पापुआ न्यू गिनी के वेस्ट न्यू ब्रिटेन प्रांत के गवर्नर शशींद्रन मुथुवेल ने संयुक्त रूप से किया है। पुस्तक का प्राक्कथन प्रधानमंत्री मारपे ने लिखा है।
प्रधानमंत्री मोदी ने लेखकों को बधाई दी और पापुआ न्यूगिनी में भारतीय विचार और संस्कृति के सिद्धांतों को संरक्षित करने में उनके योगदान के लिए उनकी सराहना की।

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