मुरैना : मध्यप्रदेश के मुरैना जिला जहां गजक की मिठास ने देश व दुनिया में लोगों के दिल और दिमाग में पैठ बना ली है, वही शहद उत्पादन को लेकर एक नई पहचान बना रहा है। जिले के आजीविका मिशन से जुड़े कई स्व-सहायता समूह की महिलायें शहद उत्पादन में आत्मनिर्भर हो गई है। आधिकारिक जानकारी के अनुसार मुरैना जिला खास स्वाद वाली गजक व सरसों के शुद्ध तेल की पहचान से जाना जाता है, वहीं शहद की मिठास भी घुल रही है। शहद उत्पादन से कई किसान और शहद उत्पादक जुड़े, जिसमें उनके परिवार की महिलायें प्रमुख रूप से भूमिका निभा रहीं है। आजीविका मिशन, जिला प्रशासन और कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक इसमें खास रुचि ले रहे है।
लगभग 6 हजार लोग शहद उत्पादन से जुड़े हुए है। स्व-सहायता समूह से जुड़ी सैकड़ों महिलायें भी अब इस कारोबार से जुड़कर अलग-अलग राज्यों में शहद का विक्रय कर रहीं है। आजीविका मिशन के जिला परियोजना प्रबंधक दिनेश सिंह तोमर ने बताया कि महिलाओं ने शहद उत्पादन में खास रुचि दिखाई है। लगभग 500 महिलायें सीधे तौर पर जुड़ीं हैं, जबकि सैकड़ों महिलायें परिवार के साथ भी इस व्यवसाय से जुड़ गई है। महिलाओं ने कई टन शहद का उत्पादन कर रिकॉर्ड बनाया है। जिले के पहाड़गढ़ में प्रोसेसिंग यूनिट भी लगाई है। जिले में सरसों बरशिन (मवेशियों का चारा), धनिया, अजवाईन आदि का उत्पादन अधिक होने से फ्लॉवरिंग वातावरण मिल जाता है।
कृषि विज्ञान केंद्र के सीनियर कीट वैज्ञानिक और हनी बी विशेषज्ञ डॉ. योगेश यादव ने बताया कि मुरैना में शहद उत्पादन को लेकर मधुमक्खियों को अनुकूल माहौल मिलता है। छह हजार से ज्यादा लोग खास कर महिलायें भी शहद उत्पादन से जुड़ी हुई है। ग्वालियर-चंबल संभाग के कमिश्रर दीपक सिंह ने बताया कि मुरैना के किसानों खास कर स्व-सहायता समूह की महिलाओं ने शहद उत्पादन में नया मुकाम हासिल किया है। विशेषज्ञों से और ट्रेनिंग दिलवाई जायेगी, आने वाले दिनों में कई देशों में शहद का एक्सपोर्ट देखने को मिलेगा।
