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केजरीवाल ने की केंद्र के अध्यादेश की कड़ी आलोचना

हैदराबाद : अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार की ओर से अधिकारियों के स्थानांतरण और पदस्थापना के संबंध में लाये गये अध्यादेश की शनिवार को कड़ी आलोचना की और कहा कि इसका उद्देश्य दिल्ली के प्रशासन में बाधा डालना है। केजरीवाल इस समय अधिकारियों के स्थानांतरण और पदस्थापना के संबंध में उच्चतम न्यायालय के आदेश को पलटते हुए केंद्र द्वारा जारी अध्यादेश के खिलाफ समर्थन जुटाने के लिए विभिन्न राज्यों का दौरा कर रहे हैं। इसके तहत उन्होंने पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान के साथ तेलंगाना के मुख्यमंत्री के. चंद्रशेखर राव से प्रगति भवन में मुलाकात की और उनसे समर्थन मांगा।
बाद में पत्रकारों से बात करते हुए केजरीवाल ने तेलंगाना के मुख्यमंत्री की सहायता के लिए दिल्ली के लोगों की ओर से धन्यवाद देते हुए उनका आभार व्यक्त किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित का सेवा संबंधी मामलों पर पूरा नियंत्रण था।
दिल्ली के मुख्यमंत्री ने कहा कि उन्होंने आठ साल तक लड़ाई लड़ी और 11 मई को दिल्ली के लोगों के पक्ष में फैसला आया, हालांकि आठ दिन के भीतर, मोदी सरकार ने इस विरोधी अध्यादेश को पेश कर दिल्ली प्रशासन को अपने कब्जे में ले लिया।
उन्होंने इस बात पर चिंता जतायी कि अगर उच्चतम न्यायालय के निर्देशों की अनदेखी की गई तो लोग न्याय की तलाश कहां करेंगे। उन्होंने कहा कि इससे दिल्ली के लोगों का अपमान हुआ है। यह समस्या केवल दिल्ली के लोगों तक ही सीमित नहीं है बल्कि पूरे देश को प्रभावित करती है।
भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) का गैर-भाजपा सरकारों को धमकाने और गिराने के लिए इस्तेमाल करने का आरोप लगाते हुए श्री केजरीवाल ने गैर-भाजपा सरकारों को अस्थिर करने की पार्टी की आदत पर प्रकाश डाला। केजरीवाल ने कहा कि यदि राज्यपाल शासन इच्छानुसार लागू किया जा सकता है तो मुख्यमंत्री चुनने की आवश्यकता ही क्या है। उन्होंने भाजपा को प्रभावी ढंग से चुनौती देने के लिए सभी गैर-भाजपा दलों को एकजुट करने के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने लोगों से अपनी स्वतंत्रता की रक्षा के लिए मोदी सरकार को हराने का आग्रह किया।
पंजाब के मुख्यमंत्री ने श्री केजरीवाल का समर्थन करते हुए कहा कि वह देश के लोकतंत्र की रक्षा के लिए लड़ रहे हैं। उन्होंने दिल्ली में शनिवार को हो रही नीति आयोग की बैठक की भी आलोचना करते हुए आरोप लगाया कि यह महज औपचारिकता है और इसमें कोई सार्थक उद्देश्य नहीं है। श्री मान ने कहा कि बैठकें उनकी मरजी के अनुसार आयोजित की जाती हैं।

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