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हर नागरिक करे पर्यावरण अनुकूल आचरण

गोरखपुर : योगी आदित्यनाथ ने सोमवार को कहा कि प्रदूषण नियंत्रण और पर्यावरण संरक्षण के लिए सरकार अपने स्तर पर गंभीर प्रयास कर रही है मगर हर नागरिक का भी दायित्व है कि वह प्रदूषण के दुष्परिणामों से बचने के लिए पर्यावरण अनुकूल आचरण करे।
विश्व पर्यावरण दिवस समारोह को संबोधित करते हुए श्री योगी ने कहा कि पर्यावरण संकट पर चिंता 51 वर्ष पूर्व से की जा रही है। इस दौरान आर्थिक विकास यात्रा में पर्यावरण संरक्षण कहीं छूट गया जो चिंतनीय है। पर्यावरण पृथ्वी, जल, वायु, पेड़.पौध सबका समन्वित रूप है। हम सबकी रचना भी पंचतत्वों के इर्दगिर्द हुई है। हमारा जीवन चक्र व सृष्टि एक दूसरे से जुड़े हुए हैं मगर हमने सृष्टि के तत्वों जल, वायु को प्रदूषित किया। इसका खामियाजा हमें विभिन्न प्रकार की बीमारियों के रूप में भुगतना पड़ रहा है। लोगों की कमाई का बड़ा हिस्सा इन बीमारियों के उपचार पर खर्च हो जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि पर्यावरण के साथ छेड़छाड़ करने का दुष्परिणाम प्रदेश के कुछ हिस्सों में सितंबर.अक्टूबर की असमय बाढ़ या दिल्ली में नवंबर.दिसंबर के स्मॉग के रूप में सामने है। दिल्ली में तो ऐसा संकट होता है कि लोगों को श्वांस लेने, आंखें खोलने में दिक्कत होने लगती है। उद्योगों को बंद करना पड़ता है। कभी सूखा तो कभी अतिवृष्टि से अन्न का संकट भी खड़ा हो सकता है।
योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कार्बन उत्सर्जन कम कर पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की प्रेरणा से सरकार पर्यावरण अनुकूल ऊर्जा को प्रोत्साहित कर रही है। इसके लिए शहर ही नहीं गांवों में एलईडी लाइट की व्यवस्था की जा रही है। एलईडी कार्बन उत्सर्जन कम करने का माध्यम बन रहा है। इसी तरह सोलर पावर को भी बढ़ावा दिया जा रहा है।
पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में नमामि गंगे प्रोजेक्ट का उल्लेख करते हुए उन्होने कहा कि आज प्रयागराज, काशी में गंगा का जल स्वच्छ व अविरल हो गया है। लोग प्रसन्नता से इसका आचमन व स्नान कर रहे हैं जबकि पहले लोग प्रयागराज कुंभ में आचमन, स्नान नहीं कर पाते थे। जल संरक्षण के लिए ही पीएम मोदी के मार्गदर्शन में आजादी के अमृत महोत्सव में गांव.गांव अमृत सरोवर बन रहे हैं।

उन्होंने ग्राम प्रधानों से तालाबों के संरक्षण और उनके चारों तरफ पौधरोपण का आह्वान भी किया और साथ ही हर घर नल योजना में भी पानी की बर्बादी रोकने की अपील की। मुख्यमंत्री ने चार दशक में पूर्वी उत्तर प्रदेश में पचास हजार मासूमों को असमय काल कवलित करने वाली बीमारी इंसेफेलाइटिस का जिक्र करते हुए कहा कि इसके कारण प्रदूषण व गंदगी थे। पर्यावरण व स्वच्छता के प्रति जागरूक होकर इसे दोबारा पैर पसारने से रोकने के लिए सबको प्रयास करना होगा।
उन्होने कहा कि इस वर्ष विश्व पर्यावरण दिवस का ध्येय वाक्य है, सॉल्यूशन फॉर प्लास्टिक पॉल्यूशन। प्रदेश में इसे 2018 में ही बैन कर दिया गया है। उन्होंने कहा कि सिंगल यूज प्लास्टिक का इस्तेमाल पाप के समान है। फेंके गए प्लास्टिक को गाय खाकर मर जाती हैं तो गोमाता की हत्या का पाप लगता है। कभी नष्ट न होने से यह प्लास्टिक धरती मां के स्वास्थ्य पर भी बुरा असर डालती है। उन्होंने प्लास्टिक से पर्यावरण के संरक्षण के लिए सिक्स आर का मंत्र दिया। उन्होंने रिड्यूस, रियूज, रिसाइकल, रिकवर, रिफैब्रिकेट और रिपेयर के फार्मूले को अपनाने की अपील की।

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